रक्षाबंधन के पावन पर्व पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है. इस खास मौके पर उन्होंने राज्य की महिलाओं, बेटियों और सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) परिवार की आधी आबादी की रक्षा का संकल्प लिया.
अखिलेश यादव ने जोर देकर कहा कि महिलाओं के बीच असुरक्षा की भावना को खत्म करना बेहद जरूरी है. बेटियों की सुरक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, आधुनिक शिक्षा और बराबरी का हक दिलाना प्राथमिकताओं में होना चाहिए. उन्होंने वादा किया कि आने वाले समय में समाजवादी सरकार बनने पर महिलाओं के उत्थान और सम्मान के लिए ऐतिहासिक और ठोस फैसले लिए जाएंगे.
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अंत में कहा कि आज देश और प्रदेश के सामने सबसे बड़ा संकट खुद भारतीय जनता पार्टी है. जब तक बीजेपी सत्ता में रहेगी, तब तक महंगाई, बेरोजगारी, नफरत और भ्रष्टाचार का अंत नहीं हो सकता.
उन्होंने जनता और मीडिया से अपील की कि वे नफरत के मुद्दों के बजाय स्वास्थ्य, शिक्षा, महंगाई, मंडी और सड़कों की बदहाली जैसे बुनियादी सवालों पर सरकार को घेरें. सपा प्रमुख ने विश्वास जताया कि जनता अब इस सच्चाई को समझ चुकी है और आने वाले समय में बीजेपी को सबक सिखाएगी.
सवाल पूछने पर जेल और लोकतंत्र का हनन
अखिलेश यादव ने सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने और सच्चाई छिपाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अगर कोई पत्रकार सरकारी स्कूलों की बदहाली, जर्जर इमारतों या मिड-डे मील की सच्चाई दिखा दे, तो सरकार उस पर कार्रवाई कर उसे जेल भेज देती है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी सरकार कभी नहीं चाहती कि गरीब और वंचित तबके का बच्चा पढ़-लिखकर समझदार बने. अगर लोग शिक्षित होंगे, तो वे सरकार से सवाल पूछेंगे और बीजेपी सबसे ज्यादा सवालों से डरती है. अखिलेश यादव के अनुसार, जो सरकार सवाल पूछने से डरती है, वह संविधान और लोकतंत्र दोनों को कमजोर करती है.
विकास के नाम पर बर्बादी और अवैध कब्जे
प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि बीजेपी सरकार ने पिछली सरकार में बने अच्छे कामों को तबाह कर दिया है. इटावा सफारी पार्क, स्विमिंग पूल, नए स्कूल और आधुनिक मंडियों की उपेक्षा की जा रही है.
उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के मंत्री और विधायक जमीनों पर अवैध कब्जे कर रहे हैं. जिस घर का नक्शा पास नहीं है, वहां मुख्यमंत्री जाकर चाय पीते हैं और दूसरी तरफ आम लोगों के मकानों पर बुलडोजर चलाया जाता है. अस्पतालों में दवाइयां नहीं हैं, थानों में भ्रष्टाचार फैला है और विकास के नाम पर सिर्फ नफरत फैलाने की राजनीति हो रही है.
महंगाई और मुनाफाखोरी पर सरकार को घेरा
त्योहारी सीजन में बढ़ती महंगाई को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि आज पेट्रोल, डीजल से लेकर चीनी और खाने-पीने का हर सामान महंगा हो चुका है. इससे आम जनता और गरीब परिवारों के त्योहार फीके पड़ गए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि इथेनॉल नीति और चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का खेल चल रहा है. सरकार जनता से मुनाफा वसूल रही है और उद्योगपति मजे में हैं. अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि यह मुनाफा चंदे के रूप में सीधे बीजेपी के खाते में जा रहा है, जिसका इस्तेमाल चुनावों में किया जाता है.
किसानों का नुकसान और एमओयू का सच
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र के तीन काले कृषि कानूनों को अब चोरी-छिपे पिछले दरवाजे से लागू किया जा रहा है. सरकार बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू (MoU) साइन कर रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है.
उन्होंने कहा कि किसानों को सही वक्त पर न खाद मिल रही है और न ही फसलों का वाजिब दाम. मक्का, आलू और दूध उत्पादक किसान लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं. खाद की बोरियों में से मात्रा घटाई जा रही है और किसानों का शोषण जारी है. कंपनियों के साथ हो रहे समझौते गरीब किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर देंगे.
नेपाल आपदा पर जताया दुख, केंद्र से मांगी मदद
पड़ोसी देश नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सपा प्रमुख ने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा कि समय रहते वैज्ञानिक जानकारी और सैटेलाइट आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता, तो कई मासूमों की जान बचाई जा सकती थी.
आपदा प्रबंधन की कमियों को उजागर करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि हादसे के बाद संपर्क टूटने से अभी भी कई पर्यटक फंसे हुए हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि संकट की इस घड़ी में नेपाल सरकार को बड़े पैमाने पर राहत और वित्तीय सहायता दी जाए. आपदाओं से निपटने के लिए सरकारों को हमेशा अलर्ट रहने की जरूरत होती है.
