01 January Ka Panchang: सोमवार का पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

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Aaj Ka Panchang 1st January 2024:  हिंदू कैलेंडर में पंचांग एक जरूरी हिस्सा होता है. यह महीने की तीस तिथियों और पांच अंगों (वार, योग, तिथि, नक्षत्र और करण) से मिलकर बनता है. दैनिक पंचांग में आपको शुभ समय, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू माह और पहलू आदि के बारे में हर प्रकार की जानकारी प्रदान करता है. आइये जानते हैं 1 जनवरी 2024 का पंचाग…

1 जनवरी 2024 का पंचांग

वार सोमवार, 1 जनवरी 2024

1 जनवरी  2024 का शुभ मुहूर्त
पौष कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि: 1 जनवरी 2024 को दोपहर 2 बजकर 29 मिनट तक रहेगी.
आयुष्मान योग: 1 जनवरी 2024 दिन सोमवार को पूरा दिन पूरी रात पार कर के अगले दिन भोर 4 बजकर 35 मिनट.
मघा नक्षत्र: 1 जनवरी 2024 दिन सोमवार को सुबह 8 बजकर 36 मिनट तक, उसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र लगेगा.

राहुकाल 
दिल्ली: सुबह 08:31 से सुबह 09:48 तक.
मुंबई: सुबह 08:34 से सुबह 09:56 तक.
चंडीगढ़: सुबह 08:36 से सुबह 09:52 तक.
लखनऊ: सुबह 08:13 से सुबह 09:32 तक.
भोपाल: सुबह 08:31 से सुबह 09:42 तक.
कोलकाता: सुबह 07:37 से सुबह 08:58 तक.
अहमदाबाद: सुबह 08:40 से सुबह 10:01 तक.
चेन्नई: सुबह 07:56 से सुबह 09:22 तक.

1 जनवरी 2024 शुभ योग
आयुष्मान योग: 1 जनवरी 2024, सुबह 03.31-2 जनवरी 2024, सुबह 04.36 तक
गजकेसरी योग: मेष राश में गुरु-चंद्रमा की युति गजकेसरी योग बनेगा.
लक्षमी नारायण योग: शुक्र-बुध इस दिन वृश्चिक राशि में विराजमान होंगे, इससे ये योग बनता है.
आदित्य मंगल योग : सूर्य-मंगल इस दिन धनु राशि में एक साथ होंगे, जिससे ये योग बनेगा.

पढ़ें  23 February 2024 Ka Panchang: जानिए शुक्रवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
सूर्योदय: सुबह 7:14 पीएम
सूर्यास्त: शाम 5:35 पीएम

ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से किसी महीने में 31 और किसी महीने में 1 दिन होते हैं. अगर हम हिंदू कैलेंडर की बात करें तो उसके हिसाब से हर माह में 1 दिन ही होते हैं, जिन्हें तिथि कहा जाता है. ये तिथियां दो पक्षों में होती हैं. इनमें से एक पक्ष को शुक्ल और एक पक्ष को कृष्ण कहा जाता है. ये 15-15 दिन के होते हैं. हिंदू कैलेंडर के हिसाब से इन तिथियों को प्रतिप्रदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी और एक पक्ष की आखिरी तिथि को अमावस्या और दूसरे पक्ष की अंतिम तिथि को पूर्णिमा कहा जाता है. इन्हीं सब के आधार पर पंचांग बनता है.

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