नोएडा: ग्रेटर नोएडा, नोएडा और गाजियाबाद की सोसायटियों में मेंटिनेंस चार्ज न देकर बिजली का इस्तेमाल करने वाले बकाएदारों की मनमानी पर अब नकेल कसने जा रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले ने एनसीआर की सोसायटियों में बरसों से चले आ रहे सिंगल वर्सेस मल्टीपॉइंट कनेक्शन और मेंटिनेंस वसूली के विवाद पर विराम लगा दिया है।
हाईकोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि अब सुविधाएं इस्तेमाल कर मेटिनेंस रोकने वालों पर एओए सख्ती कर सकेगी, जिससे सोसायटियों का वित्तीय ढांचा चरमराने से बचेगा।
यह था मामला
आरजी रेजिडेंसी में बिजली की आपूर्ति सिंगल पॉइंट कनेक्शन के जरिए होती है। बिजली की मुख्य सप्लाई सोसायटी को मिलती है और इसके बाद अलग-अलग फ्लैटों में बिजली वितरित की जाती है। सोसायटी प्रबंधन के अनुसार, निवासियों से बिजली की वास्तविक खपत और मेंटिनेंस शुल्क की वसूली एक संयुक्त सॉफ्टवेयर व्यवस्था के जरिए होती है।
मेंटिनेंस नहीं दे रहे थे निवासी
निवासी जब अपना खाता रिचार्ज करते हैं तो उसमें से बिजली की खपत और मेंटिनेंस शुल्क का समायोजन किया जाता है। असोसिएशन ने कोर्ट में तथ्य रखे कि कुछ निवासी बिजली का भुगतान तो कर रहे थे, लेकिन मेंटिनेंस शुल्क नहीं दे रहे थे। इससे सोसायटी के रखरखाव, सुरक्षा, सफाई, लिफ्ट, बिजली, कॉमन एरिया और अन्य सेवाओं पर असर पड़ रहा था।
कोर्ट में क्या हुआ
सोसायटी में कुछ लोग मेंटिनेंस चार्ज नहीं दे रहे थे। इस पर एओए ने उनका बिजली कनेक्शन काट दिया। ऐसे लोगों ने बिजली निगम से मामले की शिकायत की। निगम ने एओए को नोटिस जारी कर बिजली बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही मल्टीपॉइंट कनेक्शन के लिए भी लोगों की मांग थी। आरजी रेजिडेंसी अपार्टमेंट ओनर्स असोसिएशन ने बिजली आपूर्ति कंपनी की ओर से जारी नोटिसों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने की। असोसिएशन की ओर से अधिवक्ता ऋषि कांत राय और शशांक शेखर राय ने पक्ष रखा।
AOA ने बताया बड़ी जीत
आरजी रेजिडेंसी एओए के पूर्व सचिव अविनाश अरुण ने फैसले को सोसायटी और नियमित भुगतान करने वाले निवासियों की जीत बताया। उन्होंने कहा कि सोसायटी में बिजली बिल और मेंटिनेंस शुल्क की व्यवस्था पारदर्शी तरीके से चल रही है। कुछ लोग केवल बिजली का बिल जमा कर मेंटिनेंस शुल्क रोक देते हैं, जबकि वे सोसायटी की सभी सुविधाओं का इस्तेमाल करते हैं।
‘सोसायटियों को हो रहा था नुकसान’
असोसिएशन का कहना है कि मल्टीपॉइंट कनेक्शन की स्थिति में कई बार निवासी बिजली बिल तो जमा कर देते हैं, लेकिन मेंटिनेंस शुल्क का भुगतान रोक देते हैं। इससे सोसायटियों को आर्थिक नुकसान होता है। एओए का आरोप है कि पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड सोसायटियों को सिंगल पॉइट से मल्टीपॉइट कनेक्शन में बदलने के लिए दबाव डाल रहा था। ये फैसला पूरे एनसीआर के लिए नजीर बनेगा। ऐसे लोगों पर लगाम लग सकेगी जो बिजली का बिल देकर मेंटिनेंश चार्ज न देकर सभी सुविधाएं भोगना चाहते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तथ्यों और सबूतों के आधार पर बिजली आपूर्ति कंपनी की ओर से जारी 8 और 13 अप्रैल के नोटिसों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बकाये की वसूली याचिकाकर्ता असोसिएशन से नहीं की जाएगी। इसके बाद कोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
