बिटकॉइन मनी लॉन्ड्रिंग मामला: शिल्पा शेट्टी के पति को मिली जमानत, कोर्ट के फैसले के बाद बोले राज कुंद्रा- सत्यमेव जयते

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बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के पति और फेमस बिजनेसमैन राज कुंद्रा के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है. मुंबई की स्पेशल पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने करोड़ों रुपये के कथित बिटकॉइन स्कैम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राज कुंद्रा को जमानत दे दी है.

बता दें कि पिछले काफी समय से इस कानूनी पेचीदगी को लेकर कुंद्रा चर्चा में थे, लेकिन अब कोर्ट के इस फैसले ने उन्हें फिलहाल बड़ी राहत पहुंचा दी है. इस मामले में उन पर 150 करोड़ रुपये के हेरफेर के आरोप लगे थे, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रही थी.

मुस्कुराते हुए दिखे राज कुंद्रा

वहीं कोर्ट परिसर के बाहर पेशी से पहले कुंद्रा के चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखी और उन्होंने मुस्कुराते हुए पैपराजी को पोज दिए, लेकिन कानूनी गलियारों में इस केस ने एक बार फिर हलचल तेज कर दी है क्योंकि आमतौर पर कानूनी कार्यवाहियों के दौरान लोग तनाव में दिखते हैं, लेकिन कुंद्रा यहां काफी रिलैक्स नजर आए.

राज कुंद्रा के वकील ने क्या कहा?

राज कुंद्रा के वकील प्रशांत पाटिल ने केस के तथ्यों को सामने रखते हुए बताया कि ED का आरोप है कि कुंद्रा को जुलाई 2017 में 285 बिटकॉइन मिले थे. उन्होंने तर्क दिया कि अगर हम ED के अपने ही आंकड़ों को देखें, तो जुलाई 2017 में इन 285 बिटकॉइन की कीमत लगभग 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी, जो उस समय के भारतीय रुपये के हिसाब से करीब 6.6 करोड़ रुपये बैठती थी. वकील का कहना है कि सजा या वसूली उसी राशि पर होनी चाहिए जो उस समय मौजूद थी, न कि आज की कीमतों पर.

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वकील ने ED की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एजेंसी ने जानबूझकर 16 अप्रैल 2024 की तारीख चुनी, जब एक बिटकॉइन की कीमत करीब 52 लाख रुपये थी. इसी आधार पर ED ने 150 करोड़ रुपये का भारी-भरकम आंकड़ा तैयार कर लिया. वकील पाटिल ने तंज कसते हुए पूछा कि अगर आज बिटकॉइन की कीमत घटकर 1 रुपये हो जाती, तो क्या ED केवल 285 रुपये की संपत्ति कुर्क (Attach) करती? या फिर कीमत जीरो होने पर क्या ED अपना केस छोड़ देती? उन्होंने कहा कि मार्केट के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाकर किसी भी रकम को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना न्यायसंगत नहीं है.

प्रशांत पाटिल के मुताबिक, किसी भी संपत्ति को कुर्क करने के लिए वही तारीख मान्य होनी चाहिए जिस दिन कथित तौर पर वह कमाई हुई थी, यानी जुलाई 2017. भविष्य की किसी भी मनमानी तारीख को आधार मानकर जांच आगे बढ़ाना गलत है. उनके अनुसार, अगर ED के दावों को सच मान भी लिया जाए, तो भी अधिकतम 6.6 करोड़ रुपये की ही कुर्की की जा सकती थी. ऐसे में 150 करोड़ रुपये की संपत्ति को अटैच करना न केवल बहुत ज्यादा है, बल्कि यह कानूनी रूप से रद्द किए जाने योग्य है.

राज कुंद्रा ने क्या कहा?

कोर्ट के बाहर बोलते हुए, कुंद्रा ने ज्यूडिशियरी पर भरोसा जताया लेकिन आगे कुछ भी बोलने से मना कर दिया और कहा, ‘पत्नी (शिल्पा शेट्टी) मुझे घर पर बोलने नहीं देती, वकील मुझे कोर्ट में बोलने नहीं देते.’ वहीं कुंद्रा पर लगाई गई जमानत की शर्तें हैं कि उन्हें ₹1 लाख की जमानत देनी होगी और वे कोर्ट की इजाजत लेने के बाद ही विदेश जा सकेंगे.

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अब आगे क्या होगा?

राज कुंद्रा के पक्ष का कहना है कि वे साल 2018 से लगातार ED की जांच में सहयोग कर रहे हैं और जब भी उन्हें बुलाया गया, वे पेश हुए. अब जमानत मिलने के बाद कुंद्रा की कानूनी टीम इस मामले को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है. वकील ने संकेत दिया है कि वे ED द्वारा जारी समन और पूरी कार्यवाही को ही चुनौती देंगे ताकि उन्हें इस केस से पूरी तरह राहत मिल सके.

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक पूरा विवाद 150 करोड़ रुपये के बिटकॉइन घोटाले से जुड़ा है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप था कि राज कुंद्रा और उनके कुछ सहयोगियों ने अवैध तरीके से बिटकॉइन के जरिए भारी-भरकम रकम का लेनदेन किया और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की. जांच एजेंसी का दावा था कि इस पूरे खेल में मोटी रकम को इधर-उधर किया गया, जो मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है. इसी सिलसिले में उन पर शिकंजा कसा गया था.

ईडी ने किया दावा

जांच एजेंसी के मुताबिक, गेन बिटकॉइन पोंजी घोटाले के मास्टरमाइंड और प्रमोटर अमित भारद्वाज से राज कुंद्रा को यूक्रेन में बिटकॉइन माइनिंग फॉर्म स्थापित करने के लिए 285 बिटकॉइन मिले थे. हालांकि इसका सौदा पूरा नहीं हो सका. ईडी का दावा है कि 285 बिटकॉइन अब भी राज कुंद्रा के पास ही है. जिसकी कीमत करीब 150 करोड़ रुपये है.

ED की जांच में सबसे बड़ी बाधा यह सामने आई कि राज कुंद्रा ने उन डिजिटल वॉलेट्स की जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया, जिनमें ये बिटकॉइन रखे गए थे. एजेंसी का कहना है कि ये बिटकॉइन घोटाले के मुख्य आरोपी अमित भारद्वाज से मिले थे, जो पूरी तरह से ‘क्राइम प्रोसीड्स’ यानी अपराध से हुई कमाई का हिस्सा थे.

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