संचार नाउ। गौतमबुद्ध नगर की जिला अदालत ने प्रेम संबंध में युवती की हत्या के मामले में दोषी धनंजय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी-द्वितीय ने सुनवाई के बाद आरोपी को हत्या का दोषी ठहराते हुए 50 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया। अदालत ने आदेश दिया कि जुर्माने की राशि में से 40 हजार रुपये मृतका के माता-पिता को प्रतिकर (क्षतिपूर्ति) के रूप में दिए जाएंगे। जुर्माना जमा न करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जेल में जताई गई अवधि इस सजा में समायोजित की जाएगी।
दरअसल,नोएडा के सेक्टर-63 थाने में ओमप्रकाश ने तहरीर देकर बताया था कि वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद का निवासी है और वर्तमान में दिल्ली के दल्लूपुरा गांव में रह रहा है। उसकी बेटी निशा कुमारी को गांव का ही रहने वाला धनंजय 27 मार्च 2024 को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। आरोप है कि आरोपी उसे अपने कमरे पर ले गया, जहां गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी धनंजय को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
अतिरिक्त जिला शासकीय अधिवक्ता शिल्पी भदौरिया ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों सहित अन्य प्रमाण प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए। सभी गवाहों व साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी के विरुद्ध हत्या का आरोप सिद्ध होने पर दोषी मानते हुए सजा सुनाए।
अदालत में अभियोजन ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड की मांग की, जबकि बचाव पक्ष ने नरमी बरतने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय द्वितीय सत्येंद्र सिंह ने आरोपी धनंजय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास तथा 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि में से 40 हजार रुपये मृतका के माता-पिता को दिए जाएं। अदालत के इस फैसले को गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी अभियोजन और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर न्याय मिलने का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
