लखनऊ। कारोबार में सुगमता (ईज आफ डुइंग बिजनेस) को बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश में सुधारों का दूसरा चरण शुरू कर दिया गया है। इस चरण में भूमि, भवन एवं निर्माण, बिजली, श्रम, अग्निशमन, पर्यावरण, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए संबंधित नियमों में व्यापक सुधार किए जाएंगे।
भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल का लखनऊ दौरा
ईज आफ डुइंग बिजनेस के सुधारों का निरीक्षण करने के लिए भारत सरकार का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को लखनऊ पहुँचा। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सचिव मीता राजीवलोचन ने मुख्य सचिव एस. पी. गोयल के कार्यालय में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की और सुधार प्रक्रिया की रूपरेखा पर चर्चा की।
निवेश बढ़ाने के लिए नियमों में बदलाव
मीता राजीवलोचन ने बताया कि दूसरे चरण में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए भूमि, भवन एवं निर्माण, बिजली, श्रम, अग्निशमन, पर्यावरण, पर्यटन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में जारी कैबिनेट सचिवालय की रैंकिंग के अनुसार, डि-रेगुलेशन 1.0 कम्प्लायंस रिडक्शन प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
औद्योगिक संगठनों से संवाद
प्रतिनिधिमंडल ने इन्वेस्ट यूपी कार्यालय में प्रमुख उद्योग संगठनों के साथ संवाद किया और उद्यमियों से सुझाव मांगे। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि विभिन्न प्रकार के मामलों में उद्यमियों पर लगे जुर्माने और दंड का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है।
सिंगल विंडो प्रणाली और निवेश मित्र 3.0
उत्तर प्रदेश सुगम्य व्यापार (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत विभागीय सेवाओं को अब सिंगल विंडो के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है। निवेश मित्र 3.0 को जल्द ही राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे व्यापार करने की प्रक्रिया और अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।
उपस्थित अधिकारी
कार्यक्रम में कैबिनेट सचिवालय के अपर सचिव राहुल शर्मा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

