UP में एक्सप्रेस-वे पर खुलेगी फायर चौकी, हर 100KM पर तैनात होगी एक टीम; गाड़ियों में झटपट बुझेगी आग!

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यूपी में सड़क हादसों और औद्योगिक दुर्घटनाओं के दौरान समय पर राहत पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने निर्देश दिया है कि प्रदेश के सभी एक्सप्रेस-वे पर हर 100 किलोमीटर की दूरी पर फायर टेंडर और एक छोटी फायर चौकी स्थापित की जाए, ताकि दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर के भीतर राहत और बचाव कार्य शुरू हो सके. यह निर्णय मुख्यमंत्री ने अग्निशमन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान लिया, जहां उन्होंने विभाग को आधुनिक, सशक्त और संवेदनशील स्वरूप में ढालने की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या, औद्योगिक विस्तार और शहरीकरण की गति को देखते हुए, अग्निशमन विभाग को केवल आग बुझाने वाले तंत्र तक सीमित नहीं रखा जा सकता. उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब फायर सर्विस को आग से आगे बढ़कर आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपात सेवाओं का समेकित तंत्र बनाना होगा.

अब फायर सर्विस बनेगी ‘मल्टी-रिस्पॉन्स यूनिट’

बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता जताई और कहा कि प्रत्येक रीजन में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त स्पेशलाइज्ड यूनिट्स गठित की जाएं. ये यूनिट्स केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल हादसों और सुपर हाईराइज बिल्डिंग्स जैसी आपात स्थितियों से निपटने में सक्षम होंगी. उन्होंने कहा कि राज्य की सुरक्षा केवल परंपरागत ढांचे से संभव नहीं, बल्कि इसके लिए तकनीकी दक्षता, अत्याधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित जनशक्ति की जरूरत है.

हर जिले में तेज और जवाबदेह फायर सर्विस

मुख्यमंत्री ने हर जिले में फायर एवं आपात सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने का आदेश दिया. उन्होंने कहा कि अब कोई जिला या कस्बा ऐसा नहीं रहना चाहिए जहां आग, हादसे या प्राकृतिक आपदा के समय तत्काल राहत न पहुंचे. इसके लिए उन्होंने विभाग से कहा कि एक जिला–एक रेस्क्यू प्लान तैयार किया जाए और हर स्तर पर फायर क्विक रिस्पॉन्स टीम सक्रिय रहे. बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश के विभिन्न एयरपोर्ट्स  कुशीनगर, आजमगढ़, श्रावस्ती, कानपुर नगर, अयोध्या, अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और सोनभद्र — पर अग्निशमन सेवाओं की समुचित जनशक्ति पहले ही तैनात की जा चुकी है.

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 नई भर्तियों और पदों से मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने विभाग में राजपत्रित संवर्ग के 98 और अराजपत्रित संवर्ग के लगभग 922 नए पदों के सृजन पर भी सहमति जताई है. इससे प्रदेश के जनपद, रीजनल और मुख्यालय स्तर पर फायर सर्विस की कार्यक्षमता में भारी बढ़ोतरी होगी. उन्होंने कहा कि राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में अतिरिक्त पद सृजित किए जाएं, ताकि प्रशिक्षण और अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार हो सके. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जिले में अकाउंट कैडर स्थापित किया जाए, जिससे विभाग की वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक क्षमता में सुधार होगा.

एक्सप्रेस-वे पर ‘सेफ्टी नेटवर्क’ तैयार

प्रदेश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष तौर पर एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा का नया खाका तैयार करने का आदेश दिया. उन्होंने कहा कि हर 100 किलोमीटर पर छोटी फायर चौकियां स्थापित की जाएंगी, जिनमें अत्याधुनिक फायर टेंडर, प्राथमिक चिकित्सा उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद रहेगा. इन चौकियों के माध्यम से किसी भी सड़क हादसे या वाहन में आग लगने की स्थिति में 10 से 15 मिनट के भीतर राहत कार्य शुरू किया जा सकेगा. यह व्यवस्था गंगा एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, और लखनऊ–आगरा एक्सप्रेस-वे जैसे प्रमुख मार्गों पर लागू की जाएगी.

समयबद्ध कार्रवाई पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभाग के पुनर्गठन की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जाए, ताकि इसका लाभ जल्द जनता तक पहुँच सके. उन्होंने कहा कि फायर सर्विस जनता के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा हुआ विभाग है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि फायर सर्विस की संरचना ऐसी होनी चाहिए जो हर परिस्थिति में त्वरित, कुशल और उत्तरदायी प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो. जनसुरक्षा के क्षेत्र में कोई भी चूक अक्षम्य है.

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आधुनिक उत्तर प्रदेश की नई दिशा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले को विशेषज्ञ ‘सुरक्षा प्रबंधन में ऐतिहासिक कदम’ मान रहे हैं. यह पहली बार है जब किसी राज्य ने एक्सप्रेस-वे पर हर 100 किलोमीटर पर फायर चौकियों का नेटवर्क बनाने का निर्णय लिया है. राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि रोकथाम और तैयारी के स्तर पर ही जोखिमों को कम करना है. मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले महीनों में प्रदेश में फायर सर्विस का डिजिटलीकरण, ड्रोन और GPS आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और ऑनलाइन रेस्पॉन्स ट्रैकिंग मॉड्यूल भी शुरू किए जाएंगे, जिससे किसी भी हादसे पर रियल टाइम में नियंत्रण संभव होगा.

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