चित्रकूट: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में आई भीषण आपदा से प्रभावित क्षेत्रों का व्यापक जायजा लिया। उन्होंने हवाई सर्वेक्षण करने के साथ-साथ रामघाट एवं आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आपदा से हुए हर नुकसान की भरपाई सरकार करेगी।
बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री और आवास का आवंटन
निरीक्षण के पश्चात मुख्यमंत्री ने लगभग 800 बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की। इसके साथ ही:
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आवास आवंटन: बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को नए आवास निर्माण के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र सौंपे गए।
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आर्थिक सहायता: आपदा मोचक निधि से पीड़ितों को मुआवजा व राहत राशि प्रदान की गई।
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जनसंवाद: मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों से बातचीत कर उनका हाल-चाल जाना और बच्चों को चॉकलेट बांटीं।
क्षतिग्रस्त मठ-मंदिरों का सर्वे और मरम्मत के निर्देश
धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:
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बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुए मठ-मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों का तत्काल सर्वे कराया जाए।
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सर्वे रिपोर्ट के आधार पर इनकी मरम्मत और जीर्णोद्धार का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए।
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इन ऐतिहासिक व आस्था के केंद्रों के पुनरुद्धार में शासन पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा।
“2017 से पहले की तुलना में अब मिल रही पर्याप्त राहत”
पूर्व सरकारों की नीतियों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले बाढ़ आने पर सरकारें संज्ञान तक नहीं लेती थीं और राहत के नाम पर केवल खानापूरी की जाती थी।
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राहत सामग्री में बढ़ोतरी: उन्होंने कहा कि पहले जहां प्रभावितों को 1 किलो राहत सामग्री भी मुश्किल से मिलती थी, वहीं अब भाजपा सरकार प्रति परिवार लगभग 50 किलो गुणवत्तापूर्ण राहत सामग्री उपलब्ध करा रही है।
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पूर्ण सहयोग का भरोसा: मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रभु श्रीराम ने वनवास के दौरान चित्रकूट में आश्रय लिया था। आज जब चित्रकूटवासी संकट में हैं, तो सरकार और भाजपा कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ उनके साथ खड़े हैं।”
त्वरित राहत व बचाव कार्य: 8 प्लाटून/कंपनियां तैनात
चित्रकूट में अचानक बढ़े जलस्तर की स्थिति को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया:
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जैसे ही आपदा की सूचना मिली, लखनऊ से तत्काल निर्देश जारी कर SDRF, NDRF और PAC की फ्लड यूनिट की 8 अतिरिक्त कंपनियों को रवाना किया गया।
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महज दो से तीन घंटे के भीतर राहत टीमों ने युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाकर घरों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया।
रिकॉर्ड बारिश से भारी तबाही; नदी कैचमेंट के प्रबंधन पर बल
इस वर्ष हुई अतिवृष्टि के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया:
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दोगुनी बारिश: गत वर्ष क्षेत्र में 360 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस बार बारिश का स्तर लगभग दोगुना दर्ज किया गया है।
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संरचनात्मक क्षति: जलस्तर के प्रचंड वेग के कारण मध्य प्रदेश को जोड़ने वाला भारी वाहनों का पक्का पुल भी बह गया।
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भविष्य की कार्ययोजना: मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि नदी के स्वाभाविक प्रवाह में बाधा डालने वाले अवैध या असावधानीपूर्वक किए गए निर्माणों से बचना होगा और कैचमेंट एरिया के प्रबंधन के लिए नई रणनीति बनाई जाएगी।
