संचार नाउ। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS), ग्रेटर नोएडा में पिछले 10 से 13 वर्षों से कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं ने अपनी नौकरी पर मंडरा रहे संकट को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। कर्मचारियों का आरोप है कि कोविड-19 महामारी के दौरान जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा करने के बावजूद अब उन्हें हटाकर नई भर्ती की तैयारी की जा रही है।
दरअसल, कर्मचारियों द्वारा प्रशासन को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि संस्थान में लगभग 400 आउटसोर्सिंग कर्मचारी और प्रशिक्षु वर्षों से विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्ष 2023 में भी भर्ती प्रक्रिया को लेकर आशंकाएं उत्पन्न हुई थीं, लेकिन उस समय आश्वासन दिया गया था कि कार्यरत कर्मचारियों को हटाया नहीं जाएगा। अब संस्थान की वेबसाइट पर नए विज्ञापन जारी होने के बाद कर्मचारियों में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
उनके अनुसार, कोविड काल में जब स्वास्थ्य व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव था, तब इन कर्मचारियों ने दिन-रात काम कर मरीजों की देखभाल की। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मेहनत और अनुभव के कारण ही संस्थान ने बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन अब उनके योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
कर्मचारियों ने यह भी बताया कि कई कर्मचारी आयु सीमा के करीब पहुंच चुके हैं। यदि उन्हें सेवा से हटाया जाता है तो उनके लिए नया रोजगार प्राप्त करना बेहद कठिन हो जाएगा, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।
उनके द्वारा मांग की गई है कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को नियमितीकरण या समायोजन में प्राथमिकता दी जाए। साथ ही नई भर्ती प्रक्रिया को रोककर वर्तमान कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए न्यायसंगत निर्णय लिया जाए।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 15 जून 2026 को संस्थान के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उनका कहना है कि वे अपने रोजगार और परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
