नोएडा प्राधिकरण ने किसानों की जमीन का सर्वे किया शुरू, जानिए किसे और कैसे होगा फायदा?

Sanchar Now
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नोएडा। किसान की जमीन का चिह्नांकन करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने गांव-गांव सर्वे शुरू करा दिया है। सर्वे में इस बात का जिक्र अनिवार्य रूप से शामिल होगा कि किन-किन किसानों का किस-किस खसरा नंबर पर कितनी जमीन प्राधिकरण ने अब तक अधिग्रहित की है। उसका कितना मुआवजा बना, किस-किस को दिया गया।

मुआवजा के आधार पर कितने किसानों का पांच प्रतिशत विकसित भूखंड बना, कितनों को दिया गया, कितने किसानों का पांच प्रतिशत भूखंड दिया जाना शेष है, जिन्हें यह नहीं दिया गया, उसका कारण क्या रहा।

अधिसूचित क्षेत्र से प्राधिकरण के खाते में आएगी जमीन

यदि निस्तारण नहीं हुआ तो उसका कारण क्या रहा, उस जमीन की वास्तविक स्थिति क्या है। सर्वे पूरा होने के बाद यह पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगा कि प्राधिकरण को कितने किसानों का काम करना है, निस्तारण के बाद कितनी जमीन अधिसूचित क्षेत्र से प्राधिकरण के खाते में आ सकती है।

किसानों को बरगलाकर डेवलपर को जमीन दिलावा रहे किसान नेता

बता दें कि नोएडा प्राधिकरण अब पूरी तरह से किसानों के हित में गांव-गांव विनियमितिकरण कर आबादी निस्तरण, पांच प्रतिशत विकसित भूखंड, अदालत के आदेश पर पांच प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने का निर्णय कर चुका है।

किसानों को उनका हक देकर लाभांवित करने लगा है, लेकिन कुछ तथा कथित किसान नेता किसानों को बरगलाकर प्राधिकरण की जगह डेवलपर को जमीन दिलावा रहे है, जिससे नियोजित शहर की सूरत बिगड़ रही है।

इन गांवों में शुरू हुआ जमीन सर्वे का काम 

जब भी कोई कार्रवाई प्राधिकरण अधिकारियों की ओर से की जाती है, उनके साथ उनका सीधा टकराव होता है। अब प्राधिकरण किसानों मसलों को हल करने के बाद अधिसूचित क्षेत्र की बाकी जमीन पर कब्जा लेगा, इसके लिए बरौला, हाजीपुर, सोहरखा, भंगेल, सलारपुर, सदरपुर, गढ़ी शहदरा, गेझा तिलपताबाद, याकूबपुर, नया गांव, बदौली, मंगरौली, गुलावली, झट्टा, सफीपुर, नंगलीवाजिदपुर समेत तमाम गांव है, जहां तेजी से प्राधिकरण की ओर से काम किया जा रहा है।

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प्राधिरकण ने आबादी निस्तारण के लिए गेझा तिलपताबाद, याकूबपुर, मंगरौली में विनियमितिकरण के सर्वे का काम पूरा कर लिया है।

नोएडा प्राधिकरण सीईओ डॉ. लोकेश एम ने कहा कि गांव-गांव सर्वे के जरिये किसानों की जमीन का चिह्नाकंन हो रहा है, जिससे उनकी समस्याओं का त्वरित निस्तारण कराया जा सके। इससे कितने किसानों पर प्राधिकरण को काम करना है, उसकी एक संख्या स्पष्ट सामने आएगी, गतिरोध भी समाप्त होगा।

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