अब फाइलों में नहीं अटकेगा विकास, सीएम योगी हर महीने करेंगे बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा

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उत्तर प्रदेश के समग्र और संतुलित विकास को और गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अहम निर्णय लिया है। अब राज्य की प्रमुख विकास परियोजनाओं की समीक्षा हर महीने नियमित रूप से की जाएगी, जिससे योजनाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा कराया जा सके।

हर महीने के तीसरे सोमवार को होगी समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अब प्रत्येक महीने के तीसरे सोमवार को बड़ी विकास परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। यह ऑनलाइन समीक्षा बैठक दोपहर तीन बजे से चार बजे के बीच आयोजित होगी। इस व्यवस्था से परियोजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और किसी भी स्तर पर होने वाली देरी को समय रहते दूर किया जा सकेगा।

सभी विभागों को जारी किए गए स्पष्ट निर्देश

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे। इसके साथ ही मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और विभागाध्यक्ष भी इस ऑनलाइन समीक्षा बैठक से जुड़ेंगे।

हर माह 10 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की होगी समीक्षा

स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन द्वारा हर महीने राज्य की 10 ऐसी परियोजनाओं और कार्यक्रमों को चयनित किया जाएगा, जो अधिक महत्व की हों और जिनका सीधा प्रभाव बड़ी संख्या में आम जनता पर पड़ता हो। इसके अलावा उन योजनाओं को भी प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें राज्य और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय की आवश्यकता होती है।

आरटीई के तहत अनाथ बच्चों को भी मिलेगा मुफ्त दाखिला

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शिक्षा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अनाथ बच्चों को भी निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिले की सुविधा देने का फैसला किया है। ऐसे बच्चे जिस अनाथालय, बालगृह या परिवार के साथ रह रहे होंगे, उसी को उनका अभिभावक मानते हुए आधार कार्ड के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा।

ड्रेस और स्टेशनरी के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता

आरटीई योजना के अंतर्गत दाखिला पाने वाले अनाथ बच्चों को ड्रेस और स्टेशनरी के लिए पांच हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे उस अभिभावक के आधार से जुड़े बैंक खाते में भेजी जाएगी, जिसके संरक्षण में बच्चा रह रहा है।

बढ़ी निजी स्कूलों और सीटों की संख्या

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। अब इस दायरे में अनाथ बच्चों को भी शामिल किया गया है। राज्य में निजी स्कूलों की संख्या बढ़कर 67 हजार हो गई है, जो पिछले वर्ष 62 हजार थी। इसके साथ ही उपलब्ध सीटों की संख्या भी बढ़कर लगभग 6.70 लाख हो गई है।

जल्द जारी होगा प्रवेश कार्यक्रम

स्कूल शिक्षा महानिदेशालय की ओर से आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए जल्द ही विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जाएगा। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को इस योजना का लाभ मिले। इसके अंतर्गत निजी स्कूलों को प्रति छात्र प्रति माह 450 रुपये की शुल्क प्रतिपूर्ति भी की जाती है।

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