बरेली। मुंबई के जुहू इलाके में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई फायरिंग की घटना के बाद यूपी पुलिस भी ऐक्शन मोड में है। पुलिस ने फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी के बरेली वाले घर की सुरक्षा बढ़ा दी है। पिछले साल गोल्डी बराड़-रोहित गोदारा गैंग ने दिशा पाटनी के घर लगातार दो दिन फायरिंग की थी। गैंग ने दिशा पाटनी की बहन मेजर खुशबू पाटनी द्वारा संतों पर की गई टिप्पणी को लेकर नाराजगी जताई थी। रविवार को टाइगर श्रॉफ पर हमले की घटना ने दिशा पाटनी के घर हुए हमले की याद भी ताजा कर दी। इसके साथ ही यूपी पुलिस ऐक्शन मोड में आ गई। उधर, मुंबई में रविवार शाम हुई इस घटना के कुछ घंटे बाद दिशा पाटनी टाइगर के घर पहुंची थीं।
रविवार को मुंबई में टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के बाद बरेली में दिशा पाटनी के घर की सुरक्षा की समीक्षा करने सीओ पहुंचे। पिछले साल हुई फायरिंग के बाद से वहां एक हेड कांस्टेबल और चार सिपाही तैनात हैं। परिवार को तीन गनर भी दिए गए हैं। सीओ ने अभिनेत्री दिशा पाटनी के पिता से बात कर सुरक्षा की ली जानकारी। सुरक्षा में तैनात पुलिसवालों को सतर्क रहने को कहा गया। बता दें कि फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली हैं। बरेली वाले उनके घर में सीओ पद से रिटायर उनके पिता और बहन खुशबू पाटनी रहती हैं।
दिशा पाटनी के घर हमले की सामने आई थी ये कहानी
फिल्म अभिनेत्री दिशा पाटनी के बरेली वाले घर पर पिछले साल हुई फायरिंग की पूरी कहानी सामने आ गई थी। इस कहानी का अहम किरदार मुख्य शूटर रविंद्र था। रोहित गोदारा से इशारा मिलने के बाद रविंद्र ने ही सारी कड़ियां जोड़ीं, जिसमें शराब तस्कर अनिल ने अहम भूमिका निभाई। उसने ही रामनिवास उर्फ अनिल को इस वारदात में शामिल किया था। पुलिस ने रामनिवास उर्फ दीपक उर्फ दीपू और अनिल से पूछताछ की तो इस कांड की पूरी कहानी सामने आई। पता चला कि रोहित गोदारा को गोल्डी बराड़ ने इस हमले की जिम्मेदारी सौंपी थी।
पुलिस के मुताबिक अरुण और रविंद्र के बीच गहरी दोस्ती थी। अरुण पहले सोनीपत में कंटेनर की ट्रांसपोर्ट कंपनी में सुपरवाइजर का काम करता था, जिसके चलते अनिल का वहां आना-जाना था। अनिल राजस्थान और झारखंड के रास्ते बिहार में शराब की तस्करी करता था। वह अरुण के जरिये कंटेनर में जाने वाले सामान के बीच शराब छिपाकर बिहार भेजता था। दीपक कई साल तक बस और कंटेनर पर बतौर क्लीनर काम करता था, जिसके चलते उसका अरुण के पास आना-जाना था। जब कभी वह रात में कंटेनर लेकर जाता था तो अरुण से लंबी बातचीत होती थी और उनमें भी दोस्ती हो गई।
रविन्द्र करीब दो साल पहले किसी मामले में जेल चला गया। उसके पास जमानत के रुपये भी नहीं थे। रविंद्र का एक मामला भी शराब तस्करी से संबंधित था। उसने जमानत कराने में अनिल से मदद मांगी। अनिल ने रुपये खर्च करके रविंद्र की जमानत कराई तो वह अपने मामा का दोस्त होने के कारण अनिल को भी मामा कहने लगा। इसके बाद उनके संबंधों में प्रगाढ़ता आ गई। पुलिस के मुताबिक दिशा पाटनी के घर फायरिंग में अनिल की कोई भूमिका नहीं है। लेकिन गैंग पर हो रही कार्रवाई के चलते वह भी दीपू के साथ नेपाल भागने की कोशिश कर रहा था। हालांकि मुठभेड़ में दबोच लिया गया।
