बस्ती : जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने UGC नियमों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को इस क़ानून को वापस लेना होगा, ये कानून लागू नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा, अगर देश को गृहयुद्ध से बचाना है तो इस क़ानून को वापस लेना ही पड़ेगा. उनके रहते इस क़ानून को लागू नहीं किया जा सकता है.
नौ दिवसीय श्रीराम कथा के मंच से जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा, UGC की ऐसी क्या आवश्यकता आ पड़ी कि समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है? जब तक मैं जीवित हूं और धर्माचार्य के पद पर आसीन हूं, तब तक ऐसा कोई भी कानून लागू नहीं होने दूंगा जो भेदभाव पर आधारित हो.
ब्राह्मणों को जागरुक होना होगा : जगद्गुरु ने सवाल किया कि आखिर शिक्षा नीति में बार-बार ऐसे बदलाव क्यों किए जा रहे हैं जिससे सामाजिक ताना-बाना खतरे में पड़ जाए. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहा है. दुर्भाग्य से अनेक ब्राह्मण मांस सेवन, मछली खाने और शराब का सेवन करने लगे हैं. ऐसे ब्राह्मणों को स्वयं जागरूक होना होगा.
बस्ती का नाम बदलना चाहिए : उन्होंने कहा कि बस्ती को वशिष्ठ नगर होना ही होगा. यहां के बढ़नी मिश्र गांव की अपनी अध्यात्मिक विशेषता है. गुरु वशिष्ठ ने निषाद राज को आदर किया था. अगर द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना नहीं किया होता तो महाभारत नहीं होता.
जो रामजी का वो सभी का : रामभद्राचार्य ने कहा कि गुरु वशिष्ठ ने सिर्फ राजकुमारों को ही सभी वर्गों को शिक्षा दी थी. उन्होंने कहा कि जो रामजी का है वो सभी का है. उसको छूने से कोई पाप नहीं है. गुरु वशिष्ठ छुआछूत के विरोधी थी. इसका पालन हम सबको भी करना चाहिए.
