महान मूर्तिकार राम वनजी सुतार का निधन, कला जगत ने खोया भारतीय शिल्प का अमर हस्ताक्षर

Sanchar Now
3 Min Read

संचार नाउ। देश और दुनिया में भारतीय मूर्तिकला को विशिष्ट पहचान दिलाने वाले दिग्गज शिल्पकार राम वनजी सुतार का वृद्धावस्था के कारण निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और बीती रात नोएडा के सेक्टर-19 स्थित अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही नोएडा समेत पूरे एनसीआर में शोक की लहर दौड़ गई। सुबह से ही सेक्टर-19 स्थित उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा, जहां कलाकार, शुभचिंतक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोग उन्हें अंतिम प्रणाम करने पहुंचे।

परिजनों के अनुसार राम सुतार की आयु लगभग 100 वर्ष के आसपास थी। आज उनका अंतिम संस्कार नोएडा के सेक्टर-94 स्थित ‘अंतिम निवास’ में किया जाएगा। अंतिम यात्रा और संस्कार को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक तैयारियां की गई हैं, ताकि श्रद्धांजलि देने पहुंचने वालों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

राम सुतार का जाना भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवनकाल में विश्वभर में 200 से अधिक मूर्तियों का निर्माण किया। संसद भवन परिसर में स्थापित प्रतिमाएं हों या देश-विदेश में लगी ऐतिहासिक मूर्तियां, उनकी कला की पहचान बारीक शिल्प कौशल, भावों की जीवंत अभिव्यक्ति और अद्भुत संरचनात्मक संतुलन रही। उनकी कृतियां केवल पत्थर या धातु नहीं, बल्कि इतिहास, विचार और राष्ट्र-चेतना की सजीव अभिव्यक्ति बनकर उभरीं।

राम सुतार को वैश्विक ख्याति 182 मीटर ऊंची ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ की रूपरेखा तैयार करने से मिली, जिसे उनके जीवन की सबसे महान कृतियों में गिना जाता है। इसके अलावा संसद भवन में स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमा सहित अनेक राष्ट्रीय स्मारकों पर उनकी अमिट छाप रही, जिनकी प्रतिकृतियां विदेशों तक भेजी गईं।

पढ़ें  मां की डांट से नाराज 11वी के छात्रा ने फांसी लगाकर की आत्महत्या

19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंदुर गांव में जन्मे राम सुतार ने जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स, मुंबई से शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने कुछ समय दिल्ली में सरकारी सेवा भी की, लेकिन बाद में नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक मूर्तिकला को ही अपना जीवन बना लिया। उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और महाराष्ट्र भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया।

उनके निधन से मूर्तिकला जगत ने एक ऐसा स्तंभ खो दिया है, जिनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को कला, साधना और अनुशासन की प्रेरणा देती रहेगी।

Share This Article
Follow:
Sanchar Now is Digital Media Platform through which we are publishing international, national, states and local news mainly from Western Uttar Pradesh including Delhi NCR through Facebook, YouTube, Instagram, Twitter and our portal www.sancharnow.com
Leave a Comment