लखनऊ. आंबेडकर जयंती से पहले योगी सरकार ने बड़ा सियासी दांव खेला है. 2027 विधानसभा चुनाव को मद्देनजर रखते हुए दलित वोट बैंक को साधने के लिए योगी सरकार ने प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्र में बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के 10 स्मारकों का कायाकल्प का फैसला लिया है. इस काम के लिए सरकार 403 करोड़ रुपए खर्च करेगी. मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस बड़े फैसले पर मुहर लगी.
प्रस्ताव के तहत प्रत्येक विधानसभा में 10 आंबेडकर प्रतिमाओं का कायाकल्प किया जाएगा. इसके तहत प्रतिमा के ऊपर छत्र, बाउंड्रीवॉल व सौन्दर्यीयकरण सौंदर्याकरण का काम किया जाएगा. समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि योगी सरकार यूपी की हर विधान सभा में 10 स्मारकों का विकास करवाएगी. इसके लिए योगी सरकार 403 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है. उन्होंने कहा कि फैसला महापुरुषों के प्रति सम्मान के संकल्प को दोहराता है.
दलित वोटर्स को साध रहे सभी
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में बाबा साहेब अंबेडकर के बहाने सियासी रोटियां सेंकने की होड़ लगी है. जहां एक ओर बसपा की राजनीति बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों के इर्द गिर्द घूमती है, वहीं समाजवादी पार्टी भी 14 अप्रैल को उनकी जयंती के दिन बड़े कार्यक्रम का ऐलान कर चुकी है. सत्तारूढ़ बीजेपी भी अंबेडकर जयंती पर कई कार्यक्रम करने का ऐलान कर चुकी हैं, जबकि बसपा सुप्रीमो इस दिन नोएडा से लेकर लखनऊ तक अपना शक्ति प्रदर्शन करने वाली है. ऐसे में योगी सरकार का यह फैसला दलित वोटर्स को साधने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
अंबेडकर क्यों हैं अहम
सियासी जानकार मानते हैं कि बसपा के हाशिये में जाने के बाद समाजवादी पार्टी, चंद्रशेखर आजाद के साथ ही बीजेपी उनके परम्परागत वोट बैंक को साधने में जुटी है. समाजवादी पार्टी का दावा है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे मिली सफलता के पीछे इसी दलित वोट का हाथ था. जबकि बीजेपी जीत की हैट्रिक लगाने के लिए दलितों को अपने पाले में करना चाहती है. जबकि मायावती अपनी खोई जमीन वापस पाना चाह रही हैं.
