कल्याण सिंह बनने के लिए चुनना पड़ता है त्याग व बलिदान का मार्ग, हिंदू गौरव दिवस पर बोले सीएम योगी

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. कल्याण सिंह की तृतीय पुण्यतिथि पर आयोजित ‘हिंदू गौरव दिवस’ के दूसरे संस्करण के कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। इस दौरान सीएम योगी ने प्रदेश की जनता की ओर से बाबूजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कल्याण सिंह के संघर्षों और चुनौतियों की यात्रा को शिखर से शून्य की यात्रा करार दिया। उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति कल्याण सिंह अचानक नहीं बन जाता है। कल्याण सिंह बनने के लिए संघर्ष, चुनौती, त्याग और बलिदान का मार्ग चुनना पड़ता है।

सीएम योगी ने कहा कि अलीगढ़ के एक सामान्य परिवार में जन्म लेने वाले ‘बाबूजी’ ने शुरुआत से ही संघर्ष और चुनौतियों का मुकाबला करना सीख लिया था। पहले किसान, फिर शिक्षक, आरएसएस के स्वयंसेवी और फिर बीजेपी कार्यकर्ता के रूप में अपनी यात्रा प्रारंभ करने वाले बाबू जी की यात्रा शून्य से शिखर तक की यात्रा है। वे विधायक भी थे, सांसद भी थे। वह प्रदेश सरकार में कांग्रेस की दमनकारी नीतियों के खिलाफ और आपातकाल के खिलाफ आंदोलन के दौरान जेल में भी बंद हुए थे। आपातकाल के बाद बनी सरकार में वह स्वास्थ्य मंत्री भी बने थे।

सीएम ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के बाद उमड़ी हुई आस्था में पहली बार भारतीय जनता पार्टी जब प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाती है, तब उस सरकार के मुख्यमंत्री भी बने थे। CM ने बताया कि बाबू जी 1997 में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने और फिर हिमाचल और राजस्थान के राज्यपाल के रूप में संवैधानिक पद के दायित्व का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए उन्होंने अपनी अंतिम यात्रा पूरी की। आज उनकी तीसरी पुण्य तिथि है। सीएम योगी ने कहा कि महत्वपूर्ण यह है कि क्या कोई कल्याण सिंह अचानक बन जाता है।

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योगी ने कहा कि कल्याण सिंह के लिए संघर्ष और चुनौती का मार्ग चुनना पड़ता है। त्याग और बलिदान का रास्ता चुनना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जब चुनौती और संघर्ष सामने होता है, तो त्याग और बलिदान का एक जज्बा होता है। तब दुनिया की कोई ताकत आपको झुका नहीं सकती है। आपका बाल बांका नहीं कर सकती है, क्योंकि उस वक्त अपार आस्था और जनविश्वास आपके साथ खड़ा होता है। इस अपार जनविश्वास के प्रतीक श्रद्धेय बाबू जी कल्याण सिंह बने हैं। उन्होंने उस समय की ताकतों का मुकाबला किया, विपरीत परिस्थितियों में काम किया, लेकिन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के मार्ग से कतई नहीं हटे। अंततः परिणाम आज हमारे सामने है।

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