आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang) 15 मार्च 2026 : आज पापमोचनी एकादशी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

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आज यानी 15 मार्च को चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। इस तिथि पर मीन संक्रांति और पापमोचनी एकादशी मनाई जा रही है। इस दिन सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत भी किया जाता है। एकादशी तिथि पर कई योग भी बन रहे हैं। आइए एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक से जानते हैं आज की तिथि, शुभ-अशुभ योग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल (Aaj ka Panchang 15 March 2026) का समय समेत आदि जानकारी।

तिथि: कृष्ण एकादशी
मास: चैत्र
दिन: रविवार
संवत्: 2082

तिथि: कृष्ण एकादशी – प्रातः 09 बजकर 16 मिनट तक
योग: परिघ – प्रातः 10 बजकर 25 मिनट तक
करण: बालव – प्रातः 09 बजकर 16 मिनट तक
करण: कौलव – रात्रि 09 बजकर 33 मिनट तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय का समय: प्रातः 06 बजकर 31 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 06 बजकर 29 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: रात्रि 04 बजकर 47 मिनट पर (16 मार्च)
चंद्रास्त का समय: दोपहर 02 बजकर 45 मिनट

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

सूर्य देव: मीन राशि में स्थित हैं
चन्द्र देव: मकर राशि में स्थित हैं

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 06 बजे से दोपहर 12 बजकर 54 मिनट तक
अमृत काल: सायं 07 बजकर 03 मिनट से सायं 08 बजकर 43 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल: सायं 05:00 बजे से सायं 06 बजकर 29 मिनट तक
गुलिकाल: दोपहर 03 बजकर 30 मिनट से सायं 05:00 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 12 बजकर 30 मिनटसे दोपहर 02:00 बजे तक

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आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव श्रवण नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।
श्रवण नक्षत्र: प्रातः 05 बजकर 56 मिनट तक (16 मार्च)
स्थान: 10° मकर राशि से 23°20’ मकर राशि तक
नक्षत्र स्वामी: चंद्रदेव
राशि स्वामी: शनिदेव
देवता: विष्णुदेव (सृष्टि के पालनहार)
प्रतीक: कान
सामान्य विशेषताएं: जिज्ञासु, बुद्धिमान, ज्ञानी, उच्च बौद्धिक क्षमता, उत्साही, अच्छे श्रोता, गंभीर, कभी-कभी निराशावादी, संकोची, आत्मविश्वास में कमी के कारण निरंतर सीखने वाले।

आज मीन संक्रांति और पापमोचनी एकादशी है

पापमोचनी एकादशी 2026

एकादशी तिथि प्रारंभ: 14 मार्च, 2026 को सुबह 08 बजकर 10 मिनट
एकादशी तिथि समाप्त: 15 मार्च, 2026 को सुबह 09 बजकर16 मिनट

पापमोचनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। एकादशी व्रत को खोलने की प्रक्रिया पारण कहलाती है, जिसे अगले दिन सूर्योदय के बाद संपन्न किया जाता है। द्वादशी तिथि के समाप्त होने से पहले पारण करना अनिवार्य है, क्योंकि नियमों का पालन न करना दोषपूर्ण माना जाता है। व्रत खोलने के लिए हरि वासर के समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए, जो द्वादशी का प्रथम चौथाई भाग होता है।
पारण के लिए सबसे उत्तम समय प्रातः काल माना गया है। दोपहर के दौरान व्रत खोलने से बचना चाहिए, परंतु यदि सुबह संभव न हो, तो दोपहर के बाद पारण किया जा सकता है। यह एकादशी समस्त पापों से मुक्ति दिलाने वाली मानी जाती है, जिसे भक्त पूरी श्रद्धा और सहजता से करते हैं।

मीन संक्रांति 2026

मीन संक्रांति पुण्य काल: सुबह 06 बजकर 31 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट
मीन संक्रांति हिंदू सौर कैलेंडर के बारहवें और अंतिम महीने की शुरुआत का प्रतीक है। वर्ष की सभी बारह संक्रांतियां दान-पुण्य के कार्यों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती हैं। प्रत्येक संक्रांति के समय से पहले या बाद की एक निश्चित अवधि ही धार्मिक गतिविधियों के लिए श्रेष्ठ होती है। मीन संक्रांति के अवसर पर संक्रांति के क्षण से सोलह घटी बाद तक का समय शुभ माना गया है, जिसमें सभी प्रकार के दान कार्य किए जाते हैं।
इस दिन भूमि दान करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। दक्षिण भारत में इस अवसर को ‘संक्रमणम’ के नाम से जाना जाता है। भक्त इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और पूरी सहजता के साथ पूजा-अर्चना करते हैं ताकि जीवन में सुख-शांति बनी रहे। यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और सेवा कार्यों के लिए उत्तम है।

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