आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang) 16 जनवरी 2025 : आज प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि, जानें शुभ मुहूर्त का समय

Sanchar Now
4 Min Read

पंचांग के अनुसार, आज यानी 16 जनवरी को शुक्र प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2026) और मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri 2026) मनाई जा रही है। इस खास अवसर पर भक्त महादेव के संग मां पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मासिक शिवरात्रि के दिन महादेव की पूजा करने से विवाह में आ रही बाधा से छुटकारा मिलता है और प्रदोष व्रत करने से सभी भय दूर होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आज का पंचांग (Aaj ka Panchang 16 January 2026) के बारे में।

तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
मास पूर्णिमांत: माघ
दिन: शुक्रवार
संवत्: 2082

तिथि: कृष्ण त्रयदशी – रात्रि 10 बजकर 21 मिनट तक
योग: ध्रुव – रात्रि 09 बजकर 06 मिनट तक
करण: गरज – प्रातः 09 बजकर 21 मिनट तक
करण: वणिज – रात्रि 10 बजकर 21 मिनट तक

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

सूर्योदय का समय: प्रातः 07 बजकर 15 मिनट पर
सूर्यास्त का समय: सायं 05 बजकर 47 मिनट पर
चंद्रोदय का समय: प्रातः 17 जनवरी को 06 बजकर 12 मिनट पर
चंद्रास्त का समय: दोपहर 03 बजकर 25 मिनट पर

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दोपहर 12 बजकर 52 मिनट तक
अमृत काल: 17 जनवरी को रात्रि 01 बजकर 09 मिनट से रात्रि 02 बजकर 55 मिनट तक

आज के अशुभ समय

राहुकाल: प्रातः 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक
गुलिकाल: प्रातः 08 बजकर 34 मिनट से प्रातः 09 बजकर 53 मिनट तक
यमगण्ड: दोपहर 03 बजकर 09 मिनट से सायं 04 बजकर 28 मिनट तक

पढ़ें  Aaj Ka Panchang, 14 April 2024 : आज चैत्र षष्ठी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव मूल नक्षत्र में रहेंगे।
मूल नक्षत्र: पूर्ण रात्रि तक
सामान्य विशेषताएं: क्रोधी, स्थिर मन, अनुशासनप्रिय, आक्रामक, गंभीर व्यक्तित्व, उदार, मिलनसार, दानशील, ईमानदार, कानून का पालन करने वाले, अहंकारी और बुद्धिमान
नक्षत्र स्वामी: केतु देव
राशि स्वामी: बृहस्पति देव
देवता: निरति (विनाश की देवी)
प्रतीक: पेड़ की जड़े

शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व

शुक्र प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक विशेष व्रत है, जो हर माह के प्रदोष तिथि को शुक्रवार को किया जाता है। इस दिन व्रती उपवास रखते हैं और शाम को शिवलिंग का पूजन और रुद्राभिषेक करते हैं। पूजा में बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरा का विशेष महत्व होता है। व्रती महामृत्युंजय मंत्र या अन्य शिव मंत्र का जाप कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह व्रत धन, सुख, स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में शांति व सौभाग्य लाने वाला माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए जाने पर भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सफलता मिलती है।

शुक्र प्रदोष व्रत पूजा विधि

स्नान और शुद्धि – सुबह या शाम को स्वच्छ जल से स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
स्थान सजाना – घर में पूजा स्थान पर सफेद कपड़ा बिछाएं और शिवलिंग स्थापित करें।
पूजा सामग्री – शिवलिंग पर बेलपत्र, सफेद फूल, धतूरा, जल, दूध, घी, कपूर और अक्षत रखें।
ध्यान और मंत्र – शिवलिंग पर जल, दूध या घी चढ़ाते हुए “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
दीपक और आरती – दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें।
फल और प्रसाद – पूजा के बाद फलों का भोग लगाएं और परिवार में बांटें।
व्रत पूर्ण करना – रात को या अगले दिन उपवास खोलें और भगवान शिव की कृपा प्राप्ति की प्रार्थना करें।

Share This Article
Follow:
Sanchar Now is Digital Media Platform through which we are publishing international, national, states and local news mainly from Western Uttar Pradesh including Delhi NCR through Facebook, YouTube, Instagram, Twitter and our portal www.sancharnow.com
Leave a Comment