यूपी के कर्मचारियों को मिलेगा आठवें वेतन आयोग का लाभ, पेंशनर्स को भी फायदा, लखनऊ आएगी टीम

Sanchar Now
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वक्त जैसे-जैसे बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसब्री भी बढ़ती जा रही है. इस बीच, 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की एक बड़ी मीटिंग लखनऊ में होने जा रही है. 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर पहले दी गई जानकारी के मुताबिक, 22 और 23 जून, 2026 को लखनऊ में अगली बैठक होगी. इसका मकसद उत्तर प्रदेश क्षेत्र में केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और विभिन्न कर्मचारी यूनियनों से मिलकर उनसे सैलरी रिवीजन, अलाउंस और पेंशन स्ट्रक्चर में सुधारों पर सुझाव लेना है.

बैठक का क्या है एजेंडा?

15 जून, 2026 को मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम समय-सीमा समाप्त होने के बाद यह पहली बड़ी बैठक होगी. आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में पैनल उत्तर प्रदेश और इसके आसपास के क्षेत्रों में रेलवे, पोस्टल, डिफेंस और इनकम टैक्स विभागों के कर्मचारी यूनियनों से आमने-सामने बात करेगा. इसमें संगठनों द्वारा जमा कराए गए ‘यूनिक मेमो आईडी’ के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी.

इससे पहले हैदराबाद, दिल्ली, श्रीनगर में भी बैठके हो चुकी हैं. आयोग की इन बैठकों का मकसद हर क्षेत्र के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और जमीनी स्तर पर उनकी उम्मीदों का पता लगाना और अपनी रिपोर्ट में उनका जिक्र करना है. लखनऊ के बाद जुलाई में बंगाल, ओडिशा में भी बैठकें होने की उम्मीद है. इन सभी जगहों में कर्मचारी यूनियनों के साथ हुई बैठकों और उनसे मिले सुझावों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसकी सिफारिशें अप्रैल, 2027 तक आ सकती है.

कर्मचारियों की क्या हैं मांगें?

  • कर्मचारी आठवें वेतन आयोग के तहत 3-4 के बीच फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं. अगर इसे मंजूरी दे दी जाती है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18000 से बढ़कर 50000 के पार पहुंच सकती है.
  • पेंशन एसोसिएशन द्वारा न्यूनतम पेंशन को अंतिम सैलरी का 67% करने और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त अलाउंसेज को बढ़ाने का प्रस्ताव है.
  • प्रमोशन और इंक्रीमेंट के नियमों में सुधार की भी मांग है. मौजूदा समय में 30 साल की नौकरी में सिर्फ 3 बार मिलने वाले वित्तीय अपग्रेडेशन को हर 6 साल में करने की मांग उठाई गई है. साथ में 5% इंक्रीमेंट की भी डिमांड है.
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किसके हाथ कमीशन की कमान?

आठवें वेतन आयोग की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. इसके अन्य सदस्यों में IIM बैंगलोर के प्रोफ़ेसर पुलक घोष और पंकज जैन (रिटायर्ड IAS) शामिल हैं, जो मेंबर-सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे हैं.

इस पैनल को केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़े सैलरी स्ट्रक्चर, भत्ते, पेंशन, सर्विस की शर्तों और अन्य संबंधित पहलुओं की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. पे कमीशन के सबसे अहम पहलुओं में से एक ‘फिटमेंट फ़ैक्टर’ होता है, जिससे बेसिक पे में बदलाव होता है. अगर पिछले रिकॉर्ड को देखें, तो छठे पे कमीशन ने 1.86 के फिटमेंट फैक्टर, सातवें पे कमीशन ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की थी. अब सभी की निगाहें आठवें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हुई हैं.

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