यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने कमर कस ली है। कई दलों ने तो उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा भी शुरू कर दी है। ऐसे में अब एनडीए के सहयोग दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने विधानसभा चुनावों के लिए 32 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर दी है। सुभासपा की नजर समाजवादी पार्टी के गढ़ आजमगढ़ पर है। आजमगढ़ में पीडीए के अलावा सपा का एमवाई समीकरण है, जिसे सुभासपा सीधी चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि पार्टी जमीनी स्तर पर काम कर रही है और उसने एनडीए में 32 सीटों पर हिस्सेदारी मांगी है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मकसद सपा के गढ़ आजमगढ़ पर कब्जा करना है। राजभर ने कहा, ‘मैं खुद अतरौलिया विधानसभा में सक्रिय हूं और वहीं से राजग उम्मीदवार रहूंगा। बातचीत हो चुकी है। आजमगढ़ में मेहनगर, दीदारगंज और अतरौलिया पर सुभासपा ने दावेदारी पेश की है।’ इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि सभी नीतिगत विषयों पर घटक दलों के सभी सम्मानित नेताओं से आपसी विचार विमर्श के बाद राजग का शीर्ष नेतृत्व निर्णय करता है। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सीटों को लेकर राजग का नेतृत्व सुभासपा नेतृत्व के साथ विचार विमर्श कर आपसी सहमति से निर्णय करेगा।
2022 के चुनाव में 19 सीटों पर चुनाव लड़ी थी सुभासपा
सपा पर निशाना साधते हुए अरुण राजभर ने दावा किया कि पिछले विधानसभा चुनावों में उसे ज़्यादा सीटें मुख्य रूप से पूर्व उत्तर प्रदेश में सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की ताकत की वजह से मिली थीं। उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन में सुभासपा ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा और छह सीटें जीतीं, लेकिन चुनाव परिणाम आने के कुछ माह बाद ही राजभर ने यह नाता तोड़ लिया और राजग में फिर से शामिल हो गये। इस बार राजभर की तैयारी सपा के सबसे प्रमुख गढ़ आजमगढ़ से ही देखी जा रही है। इसके पहले राजग गठबंधन में 2017 में सुभासपा को आठ सीटें मिली थीं जिनमें से पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर समेत चार सदस्य विधानसभा चुनाव जीते थे। ओमप्रकाश राजभर के पुत्र अरुण राजभर ने दावा किया कि इस बार पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा को ‘सबक सिखाया जाएगा’।
राजभर के निशाने पर रहते हैं अखिलेश
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर लगातार निशाने साध रहे हैं। अब उन्होंने सपा के सबसे बड़े गढ़ आजमगढ़ और उनके ‘एमवाई’ (मुसलमान-यादव) समीकरण को चुनौती देनी शुरू कर दी है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रदेश में 2027 चुनाव की तैयारी को लेकर अखिलेश के ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक नारे की धार कुंद करने के लिए राजग की ओर से सबसे आगे राजभर ही दिख रहे हैं। वह यादव पर हमले के साथ हिंदुत्व के एजेंडे को प्रमुखता दे रहे हैं। दो दशक से ज्यादा की सियासत में पहली बार मुसलमानों के संवेदनशील मामलों पर आक्रामक नजर आ रहे हैं।
सीएम योगी के खिलाफ भी रहे थे राजभर
कभी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुखर रह चुके राजभर अब हिंदुत्व के एजेंडे के जरिये उनके सुर में सुर भी मिला रहे हैं। सियासी जानकार इसे राजभर की सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं। दरअसल राजभर अब पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा के गढ़ आजमगढ़ को अपना सियासी केंद्र बना रहे हैं। आजमगढ़ और आसपास के जिलों में यादव-मुस्लिम वोट बैंक निर्णायक हैं और सपा के पीडीए फॉर्मूले का आधार भी यही दो वर्ग माने जाते हैं। राजनीतिक जानकारों का दावा है कि ऐसे में राजभर आजमगढ़ में अति पिछड़ों की अन्य जातियों में पैठ बढ़ाकर आसपास के जिलों में सपा के पीडीए समीकरण को कमजोर करना चाहते हैं। इसके लिए राजग के संजय निषाद की अगुवाई वाले निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद) और केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व की कुर्मी बिरादरी बहुल (अपना दल-सोनेलाल) समेत सहयोगी दलों से भी राजभर को ताकत मिल रही है।
2022 के चुनाव में आजमगढ़ की 10 सीटों पर जीती थी सपा
उल्लेखनीय है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ की सभी 10 सीटों पर सपा का कब्जा रहा। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सपा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में बढ़त कायम रखते हुए राज्य की 80 सीटों में आजमगढ़, घोसी, गाजीपुर, बलिया, सलेमपुर, सुलतानपुर, फैजाबाद (अयोध्या), श्रावस्ती और प्रतापगढ़ समेत कुल 37 लोकसभा सीटें जीती थीं। हाल में ओमप्रकाश राजभर ने मुसलमानों और आजमगढ़ से जुड़े कई मुद्दों पर बेबाक बयान दिए। दो जून को आजमगढ़ से पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क के संदिग्ध मोहम्मद शेख की गिरफ्तारी पर उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) को बधाई दी और इसे सपा के गढ़ से आतंकी पकड़े जाने की घटना बताया। इसके एक दिन पहले गाजियाबाद में सूर्या चौहान हत्याकांड पर ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश को निशाने पर लेते हुए ‘एक्स” पर लिखा, ”बकरीद पर आपके मतदाता असद ने मासूम सूर्या की कुर्बानी दी।’ पहले 2017 में राजग और 2022 में सपा गठबंधन के दौरान मुसलमानों पर राजभर की भाषा इतनी तल्ख नहीं रही। 2012 में तो उन्होंने दिवंगत माफिया विधायक मुख्तार अंसारी के परिवार की पार्टी कौमी एकता दल से गठबंधन में ही विधानसभा चुनाव लड़ा था और 2022 में मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी को अपनी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक बनाने में भूमिका निभाई।
