‘लंबे समय तक रह सकते हैं युद्ध के दुष्प्रभाव, भारत की सरकार है सतर्क’, राज्यसभा में बोले PM मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में चल रहे युद्ध पर विस्तार से चर्चा की और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर फंसे भारतीयों नौसेना के जवानों के फंसे होने पर चिंता जताई. पीएम ने तेल-गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘मेड इन इंडिया’ जहाजों और भंडारण की मजबूती का रोडमैप पेश करते हुए राज्य सरकारों को जमाखोरी रोकने का निर्देश दिया है. साथ ही पीएम ने डायलॉग और डिप्लोमेसी से शांति स्थापित करने का संदेश दिया और देश में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति का भरोसा दिलाया है.

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है. इसने पूरे विश्व को गंभीर ऊर्जा संकट में डाल दिया है. इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है. गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं. उनके जीवन की रक्षा भी भारत के लिए चिंता का विषय है. होर्मुज स्ट्रेट में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हैं. उनके क्रू मेंबर्स भी अधिकतर भारतीय हैं. ये भी भारत के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में जरूरी है कि भारत के इस उच्च सदन से दुनिया में संवाद का संदेश जाए. हम गल्फ के देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमने डीएस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी लगातार बात की है. भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है.

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डायलॉग और डिप्लोमेसी से होगी शांति

प्रधानमंत्री ने सदन के माध्यम से पूरे विश्व को शांति और संवाद का संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि युद्ध की शुरुआत के बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है. हम गल्फ के सभी देशों के साथ लगातार बातें कर रहे हैं. हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमारा उद्देश्य, डायलॉग और डिप्लोमेसी के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है. भारत लगातार सभी पक्षों के संपर्क में है, ताकि कूटनीति के जरिए युद्ध को रोका जा सके.

पीएम के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की बाधाओं को दूर करना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है. भारत ने नागरिकों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों का कड़ा विरोध किया है.

देश में ईंधन की कमी की आशंकाओं को खारिज करते हुए पीएम मोदी ने देश को आश्वस्त किया कि भारत के पास क्रूड ऑयल का पर्याप्त स्टोरेज मौजूद है. उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में 5.3 मिलियन मीट्रिक टन रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व स्थापित किए गए हैं. पहले भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए 27 देशों पर निर्भर था, लेकिन अब ये आपूर्ति 41 देशों से सुनिश्चित की जा रही है, ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता न रहे.

आत्मनिर्भर भारत मिशन पर जोर

पीएम मोदी ने एक गंभीर चुनौती की ओर इशारा करते हुए बताया कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों के जरिए होता है. वैश्विक संकट के वक्त ये स्थिति भारत को असुरक्षित बनाती है. इसे बदलने के लिए सरकार ने 70,000 करोड़ रुपये का एक महत्वाकांक्षी अभियान शुरू किया है, जिसके तहत स्वदेशी जहाजों का निर्माण किया जाएगा. उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ को ही वैश्विक संकटों से बचने का एकमात्र विकल्प बताया है.

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राज्य सरकारों को दिए टास्क

प्रधानमंत्री ने वर्तमान परिस्थितियों का फायदा उठाने वाले काला बाजारियों और जमाखोरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का निर्देश दिया है. उन्होंने राज्य सरकारों को दो प्रमुख कार्य सौंपे हैं: पहला, आवश्यक वस्तुओं की निरंतर निगरानी करना और दूसरा, जहां भी जमाखोरी की शिकायत मिले, वहां तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि संकट के समय आम जनता को महंगाई से बचाना शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए.

पश्चिम एशिया में हुए भारी नुकसान की भरपाई में दुनिया को लंबा वक्त लगने की बात कहते हुए पीएम ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि हमारे आर्थिक आधार बहुत मजबूत हैं और युद्ध के अल्पकालिक व दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए एक ‘इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप’ बनाया गया है. सरकार एलपीजी के साथ-साथ पीएनजी (PNG) के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रही है, ताकि घरेलू गैस की आपूर्ति सुचारू रहे.

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