जिला पंचायत से नक्शा पास कराने के बाद भी विकास प्राधिकरणों के नियमों में फंसे मकान मालिकों को बड़ी राहत मिल गई है। शासन ने इसे लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी उलझनों को समाप्त कर दिया है। शासन ने ऐसे भवनों को नियमित (वैध) करने की प्रक्रिया तय कर दी है। इसका आदेश भी गुरुवार को जारी कर दिया गया। सबसे बड़ी राहत यह है कि 200 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर बने आवासीय भवनों को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी जबकि भू-उपयोग के विपरीत होने वाले अन्य निर्माणों व टाउनशिप को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
प्रमुख सचिव आवास ने पी. गुरुप्रसाद ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी किया। यह आदेश उन मामलों के लिए जारी किया गया है, जहां विकास प्राधिकरण की सीमा के भीतर जिला पंचायतों ने नक्शे स्वीकृत किए थे और भवनों का निर्माण हो चुका है या निर्माण जारी है। ऐसे मामलों में विकास प्राधिकरणों द्वारा नोटिस और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने से विवाद पैदा हो रहे थे। अब शासन ने इन विवादों के समाधान के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
एक अप्रैल 2026 तक के नक्शों को मिलेगा लाभ
शासन के अनुसार, जिला पंचायतों द्वारा एक अप्रैल 2026 तक स्वीकृत किए गए नक्शों और उनके आधार पर बने या निर्माणाधीन भवनों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत वैध किया जाएगा। इसके लिए विकास प्राधिकरणों को 12 महीने की अवधि के भीतर सभी मामलों का निस्तारण करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला पंचायतों को भी आदेश दिया गया है कि वे एक अप्रैल 2026 तक स्वीकृत सभी नक्शों की प्रमाणिक सूची शासन और संबंधित विकास प्राधिकरणों को 15 दिन के भीतर उपलब्ध कराएं, ताकि बाद में किसी प्रकार की बैक डेटिंग न हो सके।
भवन स्वामियों को कैसे मिलेगा लाभ
शाासन के आदेश के मुताबिक यदि निर्माण विकास प्राधिकरण की महायोजना के अनुरूप है और जिला पंचायत से स्वीकृत नक्शे के आधार पर बनाया गया है, तो उसे वैध माना जाएगा। इसके लिए जिला पंचायत द्वारा स्वीकृत नक्शे का विवरण विकास प्राधिकरण को उपलब्ध कराया जाएगा। यदि निर्माण महायोजना के अनुरूप है लेकिन भू-उपयोग परिवर्तन आवश्यक है, तो विकास प्राधिकरण भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी कर भवन का नियमितीकरण करेगा। ऐसे मामलों में निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन करने पर भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत तक की छूट भी मिलेगी।
200 वर्गमीटर तक के मकानों को पूरी छूट
शासनादेश में आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए कहा गया है कि 200 वर्गमीटर तक के भूखंडों पर निर्मित आवासीय भवनों से भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क नहीं लिया जाएगा यानी ऐसे मकानों के मालिकों को नियमितीकरण के लिए किसी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
किन मामलों में नहीं मिलेगी राहत
शासन ने स्पष्ट किया है कि जलाशयों, तालाबों, सरकारी भूमि तथा महायोजना में आरक्षित जल निकायों पर बने निर्माणों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा पार्क और खुले क्षेत्र के आरक्षण से जुड़े मामलों में भी विशेष परीक्षण के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। अगर कोई ग्रीन पर निर्माण करा चुका है तो उसे उतनी ही भूमि दूसरी जगह ग्रीन छोड़नी होगी। इसके बाद भी नक्शे वैध होंगे।
वर्षों पुराने विवाद सुलझने की उम्मीद
शासन के इस फैसले से विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में जिला पंचायत से स्वीकृत नक्शों पर बने हजारों मकान मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से नोटिस, ध्वस्तीकरण और वैधता को लेकर चल रहे विवादों पर अब विराम लग सकेगा। साथ ही विकास प्राधिकरणों और जिला पंचायतों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर उत्पन्न होने वाले विवाद भी कम होने की संभावना है।
