देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को कहा है कि न्यायपालिका के पास ना तो तलवार की ताकत होती है, ना ही खजाने की शक्ति। CJI ने कहा कि ऐसे में लोगों का विश्वास ही न्यायपालिका के लिए सबसे बड़ी करेंसी होती है। CJI सूर्यकांत ने यह बातें 6वें राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर श्रृंखला को संबोधित करते हुए कहीं।
इस दौरान CJI ने न्यायपालिका की आलोचना, पारदर्शिता और जवाबदेही जैसे मामलों पर भी अहम टिप्पणियां की। CJI ने अपने भाषण में कहा कि न्यायपालिका जांच या आलोचना के दायरे से बाहर नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के बीच विश्वास बनाए रखने के लिए न्यायपालिका का पारदर्शी होना बेहद जरूरी है।
क्या बोले CJI सूर्यकांत?
बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक CJI सूर्यकांत ने अपने संबोधन में ज्यूडिशियरी की आलोचना का जिक्र करते हुए कहा, “न्यायपालिका एक संस्था के रूप में जांच से परे नहीं है और ना ही हो सकती है। न्यायिक कामकाज की निष्पक्ष और रचनात्मक आलोचना जवाबदेही और सुधार के लिए बेहद जरूरी है।” उन्होंने आगे कहा कि कोई भी अदालत खुद को जांच और सवालों से ऊपर रखकर जनता का भरोसा नहीं जीत सकती और संस्थाओं को हमेशा खुद की जांच कराने और सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
ना तलवार की ताकत, ना खजाने का अधिकार
CJI सूर्यकांत ने इस दौरान न्यायपालिका की तुलना कार्यपालिका और विधायिका से करते हुए कहा कि अदालतों के पास उनकी तरह ना तो बजट यानी खजाने की शक्ति होती है और ना ही तलवार की शक्ति। CJI ने कहा, “असल में लोगों का विश्वास ही न्यायपालिका के लिए एकमात्र ऐसी करेंसी है। इसके दम पर ही वह काम करती है।” CJI ने आगे कहा कि यह विश्वास एक बार में नहीं कमाया जा सकता और हर फैसले के साथ लोगों को भरोसा दिलाना होता है।
कारण छिपाना सही नहीं
मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि अगर कोई अदालत फैसला सुनाती है लेकिन उसके पीछे के ठोस कारण छिपाती है, तो भी उसे पारदर्शी नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता की पसंद बनने और विश्वास हासिल करने में बड़ा अंतर है। कोर्ट लोगों को खुश करके या उनकी मनपसंद के फैसले देकर भरोसा नहीं जीत सकती, बल्कि भरोसा निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए जीता जाता है।
