विक्रम-1 की सफल लॉन्चिंग: गौतम अदाणी बोले- ‘यही है असली आत्मनिर्भर भारत’

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नई दिल्ली। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने शनिवार को स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 की सफल ऑर्बिटल लॉन्चिंग पर बधाई देते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक मिशन भारत के निजी स्पेस इंडस्ट्री के लिए एक नए युग की शुरुआत है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना का सच्चा उदाहरण भी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में गौतम अदाणी ने कहा कि विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल फ्लाइट का सफल होना और मिशन के सभी उद्देश्यों को हासिल करना भारत के तेजी से उभरते निजी स्पेस इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

उन्होंने कहा, “पवन चंदाना, भारत डाका, स्काईरूट एयरोस्पेस की शानदार टीम और इस मिशन को संभव बनाने वाले इसरो तथा आईएन-स्पेस को मेरी ओर से हार्दिक बधाई।”

गौतम अदाणी ने कहा कि विक्रम-1 ने अपनी पहली ऑर्बिटल फ्लाइट में मिशन के सभी उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए एक नए दौर की शुरुआत कर दी है।

उन्होंने कहा, “इतिहास रच दिया गया है। विक्रम-1 ने अपनी पहली ऑर्बिटल फ्लाइट में मिशन के सभी उद्देश्यों को शानदार तरीके से पूरा किया है। यही ‘आत्मनिर्भर भारत’ का असली प्रमाण है।”

मिशन को भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता और नवाचार की ताकत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा, “इस टीम की औसत उम्र सिर्फ 28 वर्ष है। यह पूरी दुनिया के लिए इस बात का प्रमाण है कि युवा भारत क्या हासिल कर सकता है। जय हिंद!”

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इससे पहले शनिवार को हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस ने ‘मिशन आगमन’ के तहत विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण किया। इसके साथ ही भारत, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा ऐसा देश बन गया, जहां किसी निजी कंपनी ने सफलतापूर्वक रॉकेट को ऑर्बिट में पहुंचाने की क्षमता प्रदर्शित की है।

भारत के स्पेस प्रोग्राम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई के नाम पर विकसित चार चरणों वाला विक्रम-1 लॉन्च व्हीकल छोटे सैटेलाइट्स के लिए तेज और मांग के अनुसार लॉन्च सर्विस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

यह मिशन वैश्विक कमर्शियल लॉन्च मार्केट में भारत की स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है।

करीब सात मंजिला ऊंचा यह रॉकेट पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट – एलईओ) में लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए भेजा गया है।

इस सफल लॉन्चिंग के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियों ने ऑर्बिटल लॉन्च की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है।

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