नोएडा एयरपोर्ट पर घरेलू कार्गो सेवा शुरू, चेन्नई से आया ई-कॉमर्स प्रोडक्ट्स व नोएडा से मुंबई-हैदराबाद भेजी लीची

Sanchar Now
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ग्रेटर नोएडा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए घरेलू कार्गो संचालन की औपचारिक शुरुआत कर दी है। चेन्नई से आई पहली मालवाहक उड़ान के जेवर एयरपोर्ट पर उतरने के साथ ही उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई दिशा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। विमान के एयरपोर्ट पहुंचने पर वाटर कैनन सैल्यूट देकर उसका भव्य स्वागत किया गया।

अफकॉम होल्डिंग्स द्वारा संचालित बोइंग 737-800 एफ विमान चेन्नई से लगभग 20 टन मिश्रित कार्गो लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा। इस कार्गो में मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, ऑटो कंपोनेंट्स, खाद्य पदार्थ तथा कंसोलिडेशन शिपमेंट शामिल रहे। कार्गो अनलोडिंग के साथ ही सामान की सप्लाई और लॉजिस्टिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। विमान सामान उतारने के बाद वापस चेन्नई लौटेगा।

एनआईएएल के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि 87 एकड़ में विकसित अत्याधुनिक कार्गो टर्मिनल का संचालन एआईएसएटीएस द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तरी भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा। यह फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य उत्पादों और कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति देगा। उन्होंने बताया कि देश के लगभग 55 प्रतिशत मोबाइल फोन का निर्माण नोएडा में होता है। ऐसे में कार्गो हब बनने से इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को वैश्विक बाजार तक पहुंचने में बड़ी सुविधा मिलेगी।

वहीं, पठानकोट से पहुंची लीची के साथ मेडिकल उपकरण और ई-कॉमर्स से जुड़े मोबाइल उत्पादों को बेंगलुरु और हैदराबाद भेजा जा रहा है। नोएडा एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट है, जहां इन-बाउंड (आयात) और आउट-बाउंड (निर्यात) सुविधाओं को आपस में जोड़ा गया है, जिससे सीमलेस कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। यह एयरपोर्ट मल्टी मॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो सड़क, रेल और हवाई संपर्क से जुड़ा होगा। भविष्य में यह देश का इकलौता ऐसा कार्गो हब बनेगा, जो रेलवे नेटवर्क से भी सीधे जुड़ा होगा।

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अधिकारियों के अनुसार, अगले छह महीनों में अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानें भी शुरू होने की संभावना है। एयरपोर्ट के आसपास इलेक्ट्रॉनिक सिटी, एमएसएमई पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क, टॉय पार्क, अपैरल क्लस्टर, मेडिकल और सेमीकंडक्टर पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिनकी दूरी एयरपोर्ट से महज 10 मिनट के भीतर है। करीब 39 हजार करोड़ रुपए के निवेश वाली इस परियोजना के पहले चरण में एक रनवे संचालित हो रहा है, जबकि दूसरा रनवे निर्माणाधीन है। भविष्य में यहां पांच रनवे विकसित किए जाएंगे और एयरपोर्ट की क्षमता बढ़कर 225 मिलियन यात्रियों प्रतिवर्ष तक पहुंच जाएगी। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता 70 मिलियन यात्रियों की होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही, ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना के तहत खुर्जा की पॉटरी, अलीगढ़ के ताले, नोएडा के टेक्सटाइल और अन्य उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान बनेगी। इससे लॉजिस्टिक समय और लागत में कमी आएगी तथा निर्यात को नई रफ्तार मिलेगी।

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