संचार नाउ। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के 450 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी पिछले तीन दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की, लेकिन आज वही कर्मचारी नौकरी जाने के संकट से जूझ रहे हैं।
दरअसल, धरनारत कर्मचारियों का आरोप है कि कोरोना काल में उन्हें आश्वासन दिया गया था कि भविष्य में स्थायी भर्ती होने पर उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन अब बाहरी भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि कई लोग 10 से 14 वर्षों से संस्थान में सेवाएं दे रहे हैं और उनकी उम्र अब अन्य नौकरियों के लिए भी निकल चुकी है।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जिम्स के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद संस्थान में नियुक्त हुए और उनका कार्यकाल भी बढ़ाया जा रहा है, जबकि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को स्थायित्व नहीं दिया जा रहा। कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा और उन पर दबाव बनाया जा रहा है।
कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि विरोध स्वरूप वे अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी जलाने को मजबूर होंगे।
कर्मचारियों का कहना है कि जिन्होंने संकट के समय लोगों की जान बचाने के लिए दिन-रात काम किया, आज वही अपने भविष्य और परिवार की रोजी-रोटी बचाने के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हैं।
