संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र ग्राम भनौता में स्थित विस्टा ग्रीन्स कॉलोनी में प्लॉटों की बिक्री को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। संबंधित कॉलोनी खसरा संख्या 282 और 283 के क्षेत्र में बसाई जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा उठाया जा रहा है कि प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में प्लॉटिंग किस आधार पर की जा रही है और जमीन की वास्तविक स्थिति संभावित खरीदारों को किस प्रकार बताई जा रही है। मामले में प्राधिकरण से भूमि के स्वामित्व, अधिग्रहण और प्लॉटिंग की वैधता स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
दरअसल, भनौता गांव के इस क्षेत्र में आसपास की कई जमीनों का अधिग्रहण ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा किया जा चुका है, जबकि कुछ खसरा नंबरों का अधिग्रहण अभी नहीं हुआ है। ऐसे में संबंधित भूखंडों की वास्तविक स्थिति और कॉलोनी में चल रही प्लॉटिंग की वैधता की जांच महत्वपूर्ण है। यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि कहीं अधिग्रहीत भूमि पर तो प्लॉट नहीं बेचे जा रहे। जबकि कॉलोनाइजर्स के द्वारा इन प्लॉट को प्राधिकरण से संबंधित बताकर बेचा जा रहा है।
औद्योगिक सेक्टरों के लिए प्रस्तावित है 60 मीटर प्रस्तावित सड़क
विस्टा ग्रीन्स कॉलोनी 130 मीटर रोड के पास है। आरोप है कि यहां से औद्योगिक सेक्टर-17 और 18 को जोड़ने के लिए 60 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है। ऐसे में सवाल है कि प्रस्तावित सड़क और नियोजित विकास क्षेत्र में प्लॉटिंग किस आधार पर हो रही है? यदि जमीन सड़क की प्रस्तावित सीमा में आती है, तो भविष्य में खरीदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ऑनलाइन विज्ञापनों और निगरानी व्यवस्था पर सवाल
फेसबुक और इंस्टाग्राम पर प्लॉटों के प्रचार-प्रसार हो रहा है। ऐसे में प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर सवाल है कि अधिसूचित क्षेत्र में हो रही गतिविधियों की नियमित जांच किस प्रकार की जा रही है। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अवैध कब्जों और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई पर जोर देते रहे हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर प्रभावी निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना प्राधिकरण की जिम्मेदारी है।
खरीदारों के हितों की सुरक्षा प्राथमिकता
प्लॉट खरीदना आम परिवारों के लिए जीवनभर की बचत से जुड़ा फैसला होता है। इसलिए प्राधिकरण को खसरा संख्या 282 और 283 सहित संबंधित भूखंडों के स्वामित्व, अधिग्रहण, स्वीकृत लेआउट और बिक्री की वैधता की जांच कर स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और धोखाधड़ी सामने आने पर कानूनी कदम उठाए जाएं। अब देखना होगा कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस मामले में कब तक जांच कर स्थिति स्पष्ट करता है और संभावित खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाता है।
