ग्रैंड वेनिस मॉल के मालिक सतिंदर सिंह भसीन को ED ने किया गिरफ्तार, धोखाधड़ी से निवेशकों के पैसे हड़पने का आरोप

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प्रवर्तन निदेशालय ने ग्रेटर नोएडा के मशहूर ग्रैंड वेनिस मॉल के मालिक सतींदर सिंह भसीन को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया है. यह बड़ी कार्रवाई ईडी की लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम द्वारा 29 मई 2026 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट कानून के तहत की गई.

गिरफ्तारी के बाद आरोपी भसीन को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें 6 जून 2026 तक ईडी की रिमांड पर भेज दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई

ईडी के मुताबिक, सतींदर सिंह भसीन लगातार जांच से भाग रहे थे. एजेंसी द्वारा कई बार समन जारी किए जाने के बावजूद वह पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहे थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 2026 को एक अहम आदेश जारी करते हुए ईडी को उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने का निर्देश दिया था, जिसके तहत यह गिरफ्तारी हुई.

क्या है पूरा मामला और आरोप?

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई FIR से जुड़ा है. इन एफआईआर में भसीन इन्फोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, ग्रैंड वेनिस ग्रुप की कंपनियों, सतींदर सिंह भसीन, क्विंसी भसीन और कुछ अन्य लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था.

आरोप है कि इन लोगों ने रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश के नाम पर आम जनता और निवेशकों से करोड़ों रुपये जुटाए थे. खरीदारों से वादा किया गया था कि उन्हें तय समय सीमा के भीतर कमर्शियल यूनिट और प्रॉपर्टी सौंप दी जाएगी. हालांकि, ये प्रोजेक्ट्स कभी पूरे नहीं हुए और निवेशकों को अपनी संपत्तियों का कब्जा नहीं मिल सका.

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पैसों की हेराफेरी का नेटवर्क

ईडी की वित्तीय जांच में यह खुलासा हुआ है कि निवेशकों से जुटाई गई भारी-भरकम रकम का इस्तेमाल रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में नहीं किया गया. इसके बजाय, इस पैसे को ग्रैंड वेनिस समूह की अन्य कंपनियों और सहयोगी संस्थाओं के एक जटिल नेटवर्क के जरिए इधर-उधर कर दिया गया और जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया गया.

44 करोड़ की संपत्ति पहले ही हो चुकी है अटैच

इस मामले में ईडी पहले भी सख्त कदम उठा चुकी है. जांच एजेंसी ने सतींदर सिंह भसीन के पश्चिमी दिल्ली के पॉश इलाके राजौरी गार्डन स्थित एक आलीशान आवासीय मकान को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया था. मौजूदा बाजार दर के हिसाब से इस अटैच की गई संपत्ति की कीमत लगभग 44.06 करोड़ रुपये आंकी गई है.

अब रिमांड अवधि के दौरान ईडी भसीन से गहन पूछताछ कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निवेशकों के करोड़ों रुपये और कहां-कहां ठिकाने लगाए गए हैं और इस बड़े घोटाले में अन्य किन-किन लोगों की भूमिका रही है.

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