चारधाम यात्रा मॉक ड्रिल में दिखी आपसी तालमेल की कमी, गलत दिशा में दौड़ा दी गाड़ी!

Sanchar Now
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देहरादून: उत्तराखंड, जहां एक ओर पर्वतों की गोद में देवस्थल बसे हैं, वहीं दूसरी ओर यह राज्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से भी बेहद संवेदनशील माना जाता है. बीते वर्षों में उत्तरकाशी (1991) और पिथौरागढ़ (1998) में आए भूकंप, केदारनाथ (2013) की विनाशकारी आपदा, चमोली (2021) में ग्लेशियर टूटने की घटना और लगातार हो रहे भूस्खलन जैसे हादसों ने यह साबित किया है कि उत्तराखंड को हर वक्त सतर्क रहने की ज़रूरत है. यहां की भौगोलिक संरचना, ऊंचे पर्वत, नदियों की बहावधारा और मौसम की अनिश्चितता इसे आपदा प्रभावितराज्य बनाती है.

इसी क्रम में चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड सरकार ने राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल (Mock Drill) का आयोजन किया है, ताकि आपदा के समय में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. इस मॉक ड्रिल की निगरानी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा की जा रही है.

चारधाम यात्रा से पहले सुरक्षा अभ्यास तेज

चारधाम यात्रा (Char Dham Yatra) जैसे महत्वपूर्ण आयोजन से पहले यह मॉक ड्रिल न केवल एक ज़रूरी अभ्यास है, बल्कि संभावित आपदाओं के प्रति प्रशासन की तत्परता का परिचायक भी है. मॉक ड्रिल के दौरान भूकंप, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाओं के परिदृश्यों को ध्यान में रखकर राहत और बचाव दलों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया जा रहा है. यह मॉक ड्रिल राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से संचालित हो रही है, जहां से विभिन्न जिलों में हो रही गतिविधियों की लाइव स्ट्रीमिंग के ज़रिए निगरानी की जा रही है. कंट्रोल रूम में मौजूद अधिकारियों द्वारा यह देखा जा रहा है कि किस स्थान पर किस तरह की आपदा प्रतिक्रिया दी जा रही है और संबंधित विभाग कितनी तेजी और समन्वय से काम कर रहे हैं.

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आपदा प्रबंधन में तेजी और समन्वय की कोशिश

इस अभ्यास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर वास्तविक आपदा की स्थिति उत्पन्न होती है, तो सभी संबंधित एजेंसियां NDRF, SDRF, पुलिस, फायर सर्विस, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन मिलकर समन्वय के साथ तुरंत कार्रवाई कर सकें. मॉक ड्रिल के माध्यम से संसाधनों की उपलब्धता, इमरजेंसी प्लानिंग और कम्युनिकेशन चैनल्स की भी समीक्षा की जा रही है. उत्तराखंड सरकार का यह कदम आपदा प्रबंधन की दिशा में एक अहम प्रयास है, जिससे न केवल प्रशासन की तैयारियों को परखा जा सकेगा बल्कि आमजन में भी आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी.

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