घुसपैठियों को चुन-चुनकर देश से बाहर निकालने की तैयारी, मोदी सरकार ने बनाई हाई-लेवल कमेटी

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नई दिल्ली। देश में अवैध घुसपैठ और उसके कारण कई भागों और खासकर सीमावर्ती इलाकों में हो रहे जनसांख्यिकी परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति गठित कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में गठित कमेटी एक साल में जनसांख्यिकी परिवर्तन के कारणों का अध्ययन कर उससे निपटने के लिए स्थायी उपायों पर अपनी रिपोर्ट देगी।

जरूरत पड़ने पर इसका कार्यकाल छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त को लालकिले से जनसांख्यिकी परिवर्तन पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन की घोषणा की थी।

गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि घुसपैठ और अन्य कारणों से असमान्य जनसांख्यिकी परिवर्तन किसी भी राष्ट्र के वर्तमान व भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसे देखते हुए ही प्रधानमंत्री मोदी ने उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन का एलान किया था।

जनसांख्यिकी परिवर्तनों के कारणों समाधान प्रस्तुत करेगी कमेटी

उनके अनुसार समिति पूरे भारत में अवैध घुसपैठ और असमान्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकी परिवर्तनों के कारणों का व्यापक मूल्यांकन कर सुनियोजित और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करेगी। शाह ने कहा कि जनसांख्यिकी परिवर्तन देश की संप्रभुता के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में गंभीर बदलाव और जनजातीय समाज के संरक्षण से जुड़ी एक बड़ी समस्या है।

उन्होंने कहा कि समिति धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर भी असमान्य जनसंख्या परिवर्तन के पैटर्न का भी विश्लेषण करेगी। समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र, पूर्व आईपीएस बालाजी श्रीवास्तव और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति की सदस्य डॉक्टर शमिका रवि को समिति का सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही भारत के जनगणना आयुक्त को भी समिति में शामिल किया गया है।

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गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी नागरिक) समिति के सदस्य सचिव होंगे। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गठन के साथ ही समिति अपना काम शुरू कर देगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार समिति को आठ मुद्दों पर काम करने के लिए कहा गया है। ये इस प्रकार हैं।

  1. अवैध आप्रवास सहित जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों पर व्यापक विचार करना
  2. ऐसे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संभावित कारणों का अध्ययन करना, जैसे सीमा पार गतिविधियां (अवैध आप्रवास सहित), आर्थिक अवसर और अन्य सामाजिक-पर्यावरणीय कारक।
  3. इन परिवर्तनों के पीछे अन्तर्निहित कारकों की पहचान करना, जिसमें अवैध आप्रवास, असामान्य बसावट पैटर्न और नियोजित प्रवास शामिल हैं।
  4. धार्मिक या सामाजिक समुदायों के स्तर पर संरचनात्मक जनसंख्या परिवर्तनों का विश्लेषण करना, विशेष रूप से समान रुझानों से अलग होने पर।
  5. देश में पहले से ही रहने वाले अवैध आप्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक सुव्यवस्थित और स्थायी परिचालन प्रणाली की सिफारिश करना।
  6. ऐसे रुझानों की निरंतर निगरानी के लिए सीमा प्रबंधन, जनसंख्या स्थिरीकरण और पहचान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र की सिफारिश करना।
  7. अवैध आप्रवास और परिणामी जनसांख्यिकीय असंतुलन से संबंधित मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा प्रस्तावित करना।
  8. समिति जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों, जिनमें अवैध आप्रवास भी शामिल है, से निपटने के लिए किसी अन्य उपाय, जिसे वह उचित समझे, की सिफारिश कर सकती है।

15 अगस्त 2025 को लालकिले से पीएम ने क्या कहा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को अवैध प्रवासियों से होने वाले खतरों से बचाने के लिए एक ‘डेमोग्राफिक मिशन’ की घोषणा की थी। 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बोलते हुए, उन्होंने नागरिकों को देश की जनसांख्यिकी को बदलने की एक साजिश के प्रति सचेत किया। उन्होंने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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पीएम मोदी ने कहा था, “मैं राष्ट्र को एक चिंता, एक चुनौती के बारे में सचेत करना चाहता हूं। एक सोची-समझी साजिश के तहत, देश की जनसांख्यिकी को बदला जा रहा है, और एक नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं। ये घुसपैठिए मेरे देश के युवाओं की रोजी-रोटी छीन रहे हैं। वे हमारी बहनों और बेटियों को निशाना बना रहे हैं। वे आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं और उनकी जमीनें हड़प रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा की इस चुनौती से निपटने के लिए एक ‘उच्च-शक्ति वाले जनसांख्यिकी मिशन’ को शुरू करने की घोषणा की, ताकि भारत के नागरिकों की एकता, अखंडता और अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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