नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के वडनगर से वाराणसी तक की ‘सेवा संकल्प यात्रा’ पर निकले यात्रियों के साथ वर्चुअल माध्यम से संवाद किया है। इस दौरान पीएम मोदी ने इन यात्रियों के सेवा भाव की जमकर सराहना की और उनके इस प्रयास को प्रेरणादायक बताया।
यात्रियों से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने और इन दोनों शहरों के विशेष जुड़ाव को याद किया। उन्होंने कहा कि वडनगर और काशी दोनों का इतिहास 1000 साल से अधिक पुराना है और दोनों का उनके जीवन में बहुत बड़ा महत्व है।
जन्मभूमि और कर्मभूमि के बात को दोहराया
संवाद के दौरान पीएम मोदी ने एक बार फिर अपने जन्मस्थान और कर्मस्थान का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए वडनगर मेरा जन्मस्थान है और काशी मेरी दूसरी कर्मभूमि है। काशी में हमें बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद प्राप्त है, तो वहीं वडनगर में हटकेशेश्वर महादेव का प्रेम और आशीर्वाद मिला है।
यात्रियों के अनुभवों से खुद को जुड़ा महसूस किया
इस दौरान प्रधानमंत्री ने इन यात्रियों की तरफ से दोनों शहरों के बीच चलाए जा रहे बड़े पैमाने पर सेवा अभियानों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब वे यात्रियों से बात कर रहे थे और उनके तरफ शेयर किए गए वीडियो व तस्वीरें देख रहे थे, तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो वे खुद इस यात्रा में उनके साथ सफर कर रहे हों।
पीएम मोदी अपने संगठन के पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों में मौसम बदलने, जगहों और जरूरतों के हिसाब से कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों का उत्साह और सेवा भाव सराहनीय है।
‘विकसित भारत’ के संकल्प पर जोर
इस दौरान पीएम मोदी ने निःस्वार्थ सेवा के महत्व को भी समझाया। उन्होंने कहा कि इसी सेवा भाव से आयुष्मान योजना जैसी बड़ी जनहित योजनाएं निकली हैं। उन्होंने राजनीति और देश निर्माण के बीच के फर्क को समझाते हुए एक बड़ी बात कही।
पीएम मोदी ने कहा कि राजनीति का अपना स्थान है, चुनाव और शासन का अपना स्थान है। लेकिन हम वे लोग हैं जो राष्ट्र निर्माण का काम करते हैं। हम ‘विकसित भारत’ के संकल्प को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करने में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश का युवा ही ‘विकसित भारत’ की रीढ़ भी है और आने वाले भविष्य का मुख्य लाभार्थी भी।
