नोएडा: बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है। विद्युत निगम को बिजनेस प्लान के तहत मिले 98 करोड़ रुपये के बजट में से करीब 85 प्रतिशत राशि खर्च हो चुकी है, लेकिन शहर के कई इलाकों में अभी भी पुरानी और जर्जर बिजली लाइनें, खराब खंभे और खुले पैनल लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
विद्युत निगम की ओर से दावा किया गया था कि बिजनेस प्लान के तहत बिजली ढांचे को मजबूत किया जाएगा और अगस्त तक सभी जरूरी कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। हालांकि, शहर के कई सेक्टरों और बाजारों में स्थिति अब भी पहले जैसी बनी हुई है। जगह-जगह पुराने हाई टेंशन और लो टेंशन तार दिखाई दे रहे हैं। कई स्थानों पर बिजली के खुले पैनल भी हादसों को न्योता दे रहे हैं।
गौतमबुद्ध नगर में बिजनेस प्लान 2025-26 के तहत विद्युत निगम को बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए 98 करोड़ रुपये का बजट मिला था। इस राशि से जर्जर बिजली ढांचे को बदलने, खराब उपकरणों को दुरुस्त करने, नए उपकरण लगाने और बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन एक साल बीतने के बाद भी कई क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
बारिश के मौसम में बढ़ा खतरा
मानसून के दौरान बिजली व्यवस्था से जुड़ी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। बारिश के कारण कई जगहों पर बिजली के खंभों में करंट उतरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इससे लोगों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। नो-कट जोन में भी लगातार बिजली आपूर्ति बनाए रखना विद्युत निगम के लिए चुनौती बन रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई सेक्टरों में बिजली के पुराने खंभे और तार लंबे समय से बदले नहीं गए हैं। खुले पैनल और जर्जर तार न केवल बिजली कटौती का कारण बनते हैं, बल्कि कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
हाल के दिनों में बिजली से जुड़े हादसों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के दौरान खंभे में करंट उतरने से एक इंजीनियर की मौत हो चुकी है। इस मामले में विद्युत निगम के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया था। इसके अलावा छिजारसी क्षेत्र में हाई टेंशन लाइन का तार टूटने से दो किशोरियों समेत पांच लोग झुलस गए थे। गंभीर रूप से घायल एक युवक को कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था।
कई बाजारों में खुले पड़े हैं पैनल
शहर के प्रमुख बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में अभी भी खुले बिजली पैनल दिखाई देते हैं। इनमें सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से आम लोगों, खासकर बच्चों के लिए खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद कई जगहों पर सुधार कार्य धीमी गति से चल रहा है।
विद्युत निगम के अनुसार, बिजनेस प्लान के तहत कई सबस्टेशनों की क्षमता बढ़ाई गई है। इसके अलावा खराब तारों और उपकरणों को बदलने का काम भी जारी है। निगम का दावा है कि अधिकांश कार्य पूरे हो चुके हैं और बाकी काम अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि बिजली लाइनों में कवर्ड कंडक्टर लगाए जा रहे हैं, जिससे बारिश और अन्य कारणों से होने वाले हादसों को कम किया जा सकेगा। साथ ही बिजली आपूर्ति को अधिक सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।
बिजली सुधार के लिए मिले बजट का विवरण देखें तो वर्ष 2023-24 में 122.21 करोड़ रुपये, वर्ष 2024-25 में 121.80 करोड़ रुपये और वर्ष 2025-26 में 95.50 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था। इसके बावजूद शहर में बिजली ढांचे की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं।
अब लोगों की नजर विद्युत निगम के अगस्त तक किए जाने वाले दावों पर है। यदि जर्जर खंभे, खुले पैनल और पुरानी लाइनों को समय पर नहीं बदला गया तो आने वाले दिनों में बारिश के दौरान दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है।
