संचार नाउ। रविवार को राष्ट्रचिंतना की 35वीं गोष्ठी “अनेकता में एकात्मता” विषय पर प्रिंस इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनोवेटिव टेक्नोलॉजी, नॉलेज पार्क-3, ग्रेटर नोएडा के सभागार में आयोजित की गई। गोष्ठी का संचालन प्रो विवेक कुमार ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ईश्वर चंद्र झा रहे, जो भारत भारती संगठन के उत्तर प्रदेश, बिहार एवं दिल्ली के प्रभारी हैं। विषय का परिचय कराते हुए राष्ट्रचिंतना, ग्रेटर नोएडा के अध्यक्ष राजेश बिहारी ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है। पहनावा, खानपान और परंपराएं भिन्न होने के बावजूद भारत भूमि को कामधेनु की भांति समृद्ध करने का भाव वेदों से प्राप्त होता है। उन्होंने कणाद, आदि शंकराचार्य और उत्तर-दक्षिण परंपराओं का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में विचारों की भिन्नता के बीच एकात्मता का बीज सदैव रोपा गया है।
मुख्य वक्ता ईश्वर चंद्र झा ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि भारत भारती संगठन की स्थापना वर्ष 2005 में विनय द्वारा की गई थी। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष में वैचारिक योद्धाओं और दर्शन की कभी कमी नहीं रही। बार-बार विषम परिस्थितियों और संघर्षों के बावजूद भारत इसलिए जीवित रहा क्योंकि यहां की आस्था ने उसे अमर बनाए रखा। उन्होंने भावी पीढ़ी से आह्वान किया कि वे जाति, क्षेत्र, भाषा और पंथ से ऊपर उठकर राष्ट्रवाद को अपना ध्येय बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को कमजोर करने के प्रयास आज भी जारी हैं, लेकिन मां भारती को ललकारने वाले अंततः पराभव को ही प्राप्त होंगे।
आशीर्वचन स्वरूप प्रो बलवंत सिंह राजपूत ने कहा कि गोष्ठी का विषय नवचेतना का प्रतीक है। ज्ञान, भक्ति और कर्म ईश्वर प्राप्ति के साधन हैं। वेद और उपनिषद एक परमात्मा की अवधारणा को स्पष्ट करते हैं। भारतवर्ष में नास्तिक चार्वाक को भी महर्षि की उपाधि देकर सम्मान दिया गया, जो भारत की विचार सहिष्णुता का प्रमाण है।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान के निदेशक आर के शाक्य ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। गोष्ठी में भारत भारती के उत्तर भारत संगठन मंत्री विवेकानंद, डॉ नीरज कौशिक, डॉ संदीप कुमार, राजेंद्र सोनी, अवधेश गुप्ता, अरविंद साहू, किसलय कुमार, भोला ठाकुर, उर्वशी सिंह, अजय कुमार सिंह, वी के श्रीवास्तव तथा दिल्ली प्रांत संगठन मंत्री अपूर्व पांडे सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
