एएनएम से रिश्वत लेने में नपे वरिष्ठ सहायक, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का तगड़ा ऐक्शन

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बस्ती में प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ के दावों को बस्ती स्वास्थ्य विभाग के एक बाबू ने ठेंगा दिखा दिया है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत में तैनात बड़े बाबू प्रदीप श्रीवास्तव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बिजली की तरह दौड़ रहा है. जिसमें वह एक रिटायर महिला कर्मचारी सुनीता वर्मा से उसके एरियर भुगतान के बदले 45 हजार रुपये की गड्डियां लेते साफ नजर आ रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह वसूली माननीय न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर की गई. इस वीडियो के सामने आने के बाद यूपी डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने आरोपी बाबू को निलंबित कर दिया है.

क्या है पूरा मामला

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़िता सुनीता वर्मा का विभाग में काफी समय से एरियर बकाया था. मामले में कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए चार सप्ताह के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का कड़ा आदेश दिया था. लेकिन, सिस्टम के दीमक बन चुके बाबू प्रदीप श्रीवास्तव बिना सुविधा शुल्क के फाइल आगे बढ़ाने को तैयार नहीं थे. आरोप है कि बाबू ने साफ कह दिया था कि बिना पैसे के कोर्ट का आदेश भी फाइल में ही दबा रहेगा. बाबू की खुलेआम रिश्वत की मांग से तंग आकर पीड़िता ने उन्हें बेनकाब करने की रणनीति बनाई. जब बाबू रिश्वत की रकम (45 हजार रुपये) ले रहे थे, तभी पीड़िता के भाई ने मोबाइल कैमरे से इस पूरी काली करतूत को कैद कर लिया. वीडियो में बाबू बड़े इत्मीनान से नोटों की गिनती करते दिख रहे हैं, जिसे अब सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया है.

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डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने की कार्यवाही

स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति एक बार फिर धरातल पर दिखाई दी है. बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) विक्रमजोत में तैनात वरिष्ठ सहायक प्रदीप श्रीवास्तव को रिश्वत लेने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. सोशल मीडिया पर आरोपी बाबू प्रदीप श्रीवास्तव का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा था, जिसमें वह कथित तौर पर घूस लेते नजर आ रहे थे. मामला संज्ञान में आते ही प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री व डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कड़ा रुख अपनाया और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए.

निलंबन की कार्रवाई के साथ ही आरोपी बाबू को बस्ती से हटाकर कार्यालय अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चित्रकूट धाम मंडल (बांदा) से संबद्ध कर दिया गया है. प्रशासन ने न केवल उन्हें निलंबित किया है, बल्कि उनके खिलाफ औपचारिक विभागीय जांच भी शुरू कर दी है. प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए मंडलीय अपर निदेशक (चित्रकूट धाम मंडल, बांदा) को जांच अधिकारी नामित किया गया है. उन्हें जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आरोपी के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जा सके.

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