संचार नाउ। उत्तर प्रदेश के सबसे विकसित और हाईटेक जनपद गौतम बुद्ध नगर से शनिवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए। जेवर तहसील के कनागदी गांव निवासी सुंदर सिंह अपने चार मासूम बच्चों के साथ न्याय की उम्मीद में जिलाधिकारी कार्यालय से लखनऊ के लिए पैदल रवाना हो गए। परिवार के सभी सदस्यों की टी-शर्ट पर बड़े अक्षरों में लिखा था— “योगी जी, हमें न्याय दो या हमारा गला घोंट दो।” इसी संदेश के साथ उन्होंने मुख्यमंत्री तक अपनी पीड़ा पहुंचाने के लिए पैदल यात्रा शुरू की।
सुंदर सिंह का कहना है कि वह पिछले 10 वर्षों से अपने बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। उनके पास अपने दादा, पिता और स्वयं का वैध जाति प्रमाण पत्र मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद उनके चारों बच्चों के प्रमाण पत्र आज तक जारी नहीं किए गए। उनका आरोप है कि हर बार केवल आश्वासन मिला, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने बताया कि जाति प्रमाण पत्र न होने के कारण बच्चों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित हो रहा है। कई बार तहसील और जिला प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूर होकर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे न्याय मांगने का फैसला किया।
चार छोटे-छोटे बच्चों के साथ लंबी पैदल यात्रा पर निकले सुंदर सिंह ने कहा कि रास्ता बेहद कठिन है, लेकिन न्याय की उम्मीद उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दे रही है। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 40 से 50 किलोमीटर तक पैदल चलने का प्रयास करेंगे। वहीं बच्चों ने भी कहा कि सफर मुश्किल है, लेकिन यदि मुख्यमंत्री तक पहुंचने से उन्हें न्याय मिल सकता है तो वे यह कष्ट सहने को तैयार हैं।
गौतम बुद्ध नगर को उत्तर प्रदेश की आर्थिक राजधानी और विकास का मॉडल माना जाता है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा देश-दुनिया में आधुनिक शहरों के रूप में पहचान बना चुके हैं, लेकिन इसी जिले से एक पिता का चार मासूम बच्चों के साथ न्याय के लिए पैदल लखनऊ की ओर निकलना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों से एक परिवार अपने बच्चों के मूलभूत दस्तावेज के लिए भटकने को मजबूर है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस परिवार की दर्दभरी पुकार मुख्यमंत्री तक पहुंचने से पहले ही सुनी जाएगी, या फिर “योगी जी, हमें न्याय दो या हमारा गला घोंट दो” लिखी टी-शर्ट इस व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक बनकर रह जाएगी।
