संचार नाउ। यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे के बाद गौतमबुद्धनगर प्रशासन ने अनधिकृत रूप से संचालित बसों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। परिवहन विभाग द्वारा जिलेभर में विशेष अभियान चलाकर नियमों की अनदेखी करने वाले बस संचालकों पर शिकंजा कसा गया है। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि बड़ी संख्या में बसें अब भी बिना वैध दस्तावेजों और सुरक्षा मानकों के सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिससे यात्रियों की जान खतरे में बनी हुई है।
478 वाहनों का चालान, 332 बसें थानों में निरुद्ध
एआरटीओ प्रवर्तन डॉ. उदित नारायण पांडे ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 18 दिसंबर 2025 तक परिवहन विभाग के सभी प्रवर्तन दलों ने व्यापक कार्रवाई की। इस दौरान 478 वाहनों का चालान किया गया, जबकि 332 वाहनों को जनपद के विभिन्न थानों में निरुद्ध किया गया। सख्त प्रवर्तन के चलते विभाग को कुल 253.97 लाख रुपये का प्रशमन शुल्क प्राप्त हुआ है, जो विभाग की सक्रियता को दर्शाता है।
ओवरलोड और अवैध माल ढुलाई पर विशेष कार्रवाई
परिवहन विभाग ने यात्री बसों में ओवरलोड यात्रियों और अवैध माल परिवहन के मामलों पर भी विशेष ध्यान दिया। इस अवधि में 114 बसों का चालान किया गया और 87 बसों को निरुद्ध किया गया। विभाग का दावा है कि इस कार्रवाई से सड़क सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिली है और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम उठाए गए हैं।
कार्रवाई जारी, फिर भी सवाल कायम
एआरटीओ प्रवर्तन के अनुसार, अनधिकृत यात्री वाहनों के खिलाफ मुख्यालय से मिले निर्देशों के अनुरूप लगातार विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। बावजूद इसके, जिले और यमुना एक्सप्रेसवे पर अब भी अधिकांश बसें बिना आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के चल रही हैं। न तो इनमें हादसे के समय बचाव के पर्याप्त साधन हैं और न ही आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी की व्यवस्था। ऐसे में यात्रियों की जान जोखिम में डालकर बसों का संचालन जारी है। यही वजह है कि प्रशासन की कार्रवाई को कई लोग अभी भी ऊंट के मुंह में जीरा मान रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह अभियान किसी बड़े हादसे से पहले पर्याप्त साबित होगा।

