प्रॉपर्टी टैक्स पर बड़ी राहत देने जा रही यूपी सरकार, ब्याज और सरचार्ज होगा माफ, 15 अगस्त से शुरू होगी ये योजना

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों के लाखों प्रापर्टी टैक्स (गृहकर, जलकर और सीवरकर) बकायेदारों को बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। सभी 762 नगरीय निकायों में पहली बार एकमुश्त समाधान योजना (ओटीएस) लागू की जाएगी।

इस योजना के तहत मूल बकाया जमा करने पर ब्याज और सरचार्ज पूरी तरह माफ कर दिया जाएगा। सरकार का मकसद राजस्व वसूली बढ़ाने, करदाताओं को राहत देने और वर्षों से लंबित विवादों का निस्तारण करना है।

नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी गुरु प्रसाद ने सोमवार को इस संबंध में सभी नगर आयुक्तों, नगर पालिका परिषद तथा नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है।

योजना उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 तथा उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 के प्रावधानों के तहत लागू होगी। प्रदेश के 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायत, यानी कुल 762 नगरीय निकायों में यह योजना लागू रहेगी।

योजना के तहत गृहकर, जलकर और सीवरकर के बकायेदारों को केवल मूल कर राशि जमा करनी होगी। ऐसा करने पर उस पर लगे ब्याज और सरचार्ज में शत प्रतिशत छूट मिलेगी। हालांकि यह छूट तभी मिलेगी जब पूरा मूल बकाया जमा कर दिया जाएगा।

सरकार ने योजना का लाभ एक अप्रैल 2026 तक के लंबित बकायों पर देने का निर्णय लिया है। इसमें आवासीय, व्यावसायिक और मिश्रित उपयोग की सभी संपत्तियां शामिल होंगी।

व्यक्तिगत करदाताओं के साथ-साथ सरकारी विभागों, स्वायत्तशासी संस्थाओं और सार्वजनिक उपक्रमों को भी योजना का लाभ मिलेगा। करदाताओं को राहत देने के लिए अधिकतम तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा दी गई है।

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योजना लागू होने के 30 दिनों के भीतर कम से कम एक-तिहाई मूल बकाया जमा करना होगा, जबकि शेष राशि दो मासिक किस्तों में जमा करनी होगी। तीन माह के भीतर पूरा भुगतान अनिवार्य रहेगा।

ओटीएस योजना का संचालन 15 अगस्त से 15 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके लिए 15 अगस्त से 14 सितंबर तक नगरीय निकायों द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार और बकायेदारों को सूचना देने का अभियान चलाया जाएगा।

आनलाइन व आफलाइन दोनों तरह कर सकेंगे आवेदन

योजना के लिए आवेदन आनलाइन या आफलाइन दोनों तरह से स्वीकार किए जाएंगे। नगरीय निकाय अपनी वेबसाइट या विशेष पोर्टल के माध्यम से आवेदन स्वीकार करेंगे। सहायता के लिए हेल्प डेस्क भी बनाई जाएगी। आवेदन प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर निस्तारण करना अनिवार्य होगा।

सरकार ने नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि ई-मेल, एसएमएस, पत्र, होर्डिंग, शिविर, गोष्ठियों और इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से योजना का व्यापक प्रचार किया जाए। वहीं जो बकायेदार योजना का लाभ नहीं लेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कठोर वसूली और प्रवर्तन की कार्रवाई भी की जाएगी।

पहले जमा धनराशि नहीं होगी वापस

शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि योजना लागू होने से पहले जिन लोगों ने आंशिक या पूर्ण बकाया जमा कर दिया है, उन्हें किसी प्रकार की धनराशि वापस नहीं मिलेगी। सरकार ने नगरीय निकायों को समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए हैं।

यदि निर्धारित अवधि में आवेदन लंबित रहते हैं या योजना का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी की जवाबदेही तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। योजना की साप्ताहिक और पाक्षिक समीक्षा भी कराई जाएगी।

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