संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण में तकनीकी स्टाफ के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों ने प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत करीब 83 तकनीकी कर्मचारियों का एक साथ विभिन्न वर्क सर्किलों में पुनर्विन्यास किया गया, जिसे असामान्य कदम माना जा रहा है।
प्राधिकरण में पहले से ही सहायक प्रबंधकों की कमी बनी हुई है, जिसके चलते फील्ड स्तर पर कार्यों की जिम्मेदारी लंबे समय से तकनीकी स्टाफ पर ही निर्भर रही है। यही कर्मचारी गांवों के विकास कार्य, किसानों की समस्याओं का समाधान, 6 प्रतिशत आबादी भूखंडों से जुड़े मामलों, प्लॉट शिफ्टिंग और अवैध कब्जों जैसे मुद्दों का निस्तारण करते रहे हैं। ऐसे में एक साथ तबादलों से कार्यों की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्यतः 25–30 प्रतिशत कर्मचारियों का ही एक समय में स्थानांतरण किया जाता है, ताकि कार्यों की गति प्रभावित न हो। इसके विपरीत, इतने बड़े स्तर पर तबादले को नीतिगत संतुलन के खिलाफ बताया जा रहा है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 2027 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और गांवों में विकास कार्यों को लेकर दबाव बढ़ा हुआ है। साथ ही, जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत हाउस लिस्टिंग ब्लॉक का कार्य भी जारी है, जिसमें यही स्टाफ अहम भूमिका निभा रहा है।
हालांकि, प्राधिकरण की ओर से इस फैसले पर कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। स्थानीय स्तर पर इस आदेश की समीक्षा की मांग तेज हो रही है, ताकि प्रशासनिक दक्षता और जनहित के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।
