संचार नाउ। ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) में दवा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में अहम कार्य किया जा रहा है। संस्थान के फार्माकोलॉजी विभाग में संचालित एडवर्स ड्रग रिएक्शन मॉनिटरिंग सेंटर (AMC) मरीजों में होने वाली दवाओं की प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं (ADR) की निगरानी, मूल्यांकन और रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह केंद्र एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. एकता अरोड़ा के नेतृत्व में कार्य कर रहा है, जो एएमसी की समन्वयक भी हैं।
दरअसल, हाल ही में एडीआर रिपोर्टिंग की अहमियत उस समय सामने आई, जब पोस्ट ऑपरेटिव तीन मरीजों में टोटल पैरेंट्रल न्यूट्रिशन (TPN) दिए जाने के 20 से 30 मिनट के भीतर ठंड लगना, कंपकंपी, शरीर में कंपन और पेट में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दिए। यह तीनों मामले 24 घंटे के भीतर सामने आए, जिन्हें फार्माकोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर आलोक यादव ने नियमित फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों के दौरान पहचाना और दस्तावेजित किया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत टीपीएन का इन्फ्यूजन बंद किया गया और उचित चिकित्सकीय प्रबंधन किया गया, जिससे तीनों मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए। जांच में यह सामने आया कि तीनों मामलों का संबंध टीपीएन की एक ही बैच से था, जिससे बैच से जुड़ी खामी की आशंका हुई। इसके बाद एएमसी को तत्काल सूचना दी गई, अस्पताल की फार्मेसी को अलर्ट किया गया और संदिग्ध बैच को उपयोग से हटा लिया गया, जिससे अन्य मरीजों को संभावित नुकसान से बचाया जा सका।
एएमसी ने आमजन और स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की है कि किसी भी दवा से जुड़ी प्रतिकूल प्रतिक्रिया की सूचना तुरंत 7303884232 (24×7) पर दें। समय पर एडीआर रिपोर्टिंग से मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा मजबूत होता है।
