बिना शोधित हुए नदियों में न गिरे किसी नाले का पानी: स्वतंत्र देव सिंह

Sanchar Now
4 Min Read

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में दो बड़ी नदियां गंगा और यमुना बहती हैं। इन नदियों के किनारे बसे शहरों के नालों के पानी को गंगा के प्रवाहित किए जाने को लेकर पहले से योजना का संचालन हो रहा है। नमामि गंगे परियोजना के तहत शहरों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है। यूपी के जल शक्ति श्री स्वतंत्र देव सिंह ने शनिवार को नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के तहत चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई। नमामि गंगे परियोजना की समीक्षा के क्रम में मंत्री ने कहा कि एसटीपी निर्माण की सभी योजनाओं को समय पर पूरी कराई जाए। किसी भी नाले का पानी बिना ट्रीटमेंट के नदी में नहीं गिरना चाहिए।

मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि राज्य के पांच बड़े शहर प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, मथुरा और आगरा गंगा एवं यमुना के तट पर स्थित हैं। इसके साथ-साथ लखनऊ, अयोध्या, गोरखपुर आदि में भी एसटीपी की सुविधा को पूरी तरह से बहाल किया जाए। मंत्री ने निर्देश दिया कि छोटी नदियों के पुनरुद्धार के लिए डिस्ट्रिक्ट रिवर रिजुवेनेशन प्लान के तहत प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। प्रदेश में लागू ‘शोधित जल के पुर्नउपयोग नीति’ से संबंधित सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर पॉलिसी का प्रभावी क्रियान्वयन कराया जाए।

जलापूर्ति व्यवस्था पर जोर

मंत्री ने गर्मी के मौसम में जलापूर्ति व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक गांवों में जल जीवन मिशन एवं जल निगम (ग्रामीण) की योजनाओं के माध्यम से नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। नियमित जलापूर्ति में आने वाली समस्याओं का समय निराकरण कराया जाए। मंत्री ने आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, उन्नाव, बलिया जैसे जिलों में जलापूर्ति व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन फेज-4 के तहत सरफेस वाटर आधारित योजनाओं का कार्य प्रगति पर है। इनको पूरा होने में अभी समय लगेगा।

पढ़ें  सीतापुर में सीनियर डॉक्टर ने किया सुसाइड, रिवॉल्वर से खुद की कनपटी पर मारी गोली, नौकरानी ने खोला अंदरूनी राज

मंत्री ने कहा कि ऐसे जिलों में वर्तमान आवश्यकता को देखते हुए विभिन्न योजनाओं के तहत लगाए गए करीब 8000 अधिक टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट संचालित किया जाए। अगर कहीं टीटीएसप के मरम्मत की जरूरत है तो उसे 15 दिनों में ठीक करा लें। इससे गुणवत्ता एवं मात्रा प्रभावित क्षेत्र के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा।

जल संचयन का किया जिक्र

प्रदेश में भूगर्भ जल की स्थिति की समीक्षा की गई। मंत्री की समीक्षा के क्रम में 8-9 सालों में प्रदेश के भूगर्भ जल को अधिक निकालने वाले विकास खंडों की संख्या में कमी आई है। वर्ष 2017 में प्रदेश के 82 विकास खंड अतिदोहित श्रेणी में वर्गीकृत थे। वहीं, वर्ष 2025 के आंकलन के अनुसार यह संख्या घटकर अब 44 हो गई है। मंत्री ने कहा कि 10 शहरों में जहां भूगर्भ जल सबसे अधिक निकाला जाता है, वहां व्यापक जनजागरूकता चलाई जाए। इसमें प्रशासन से लेकर तमाम एजेंसियों को लगने का निर्देश दिया है।

Share This Article
Follow:
Sanchar Now is Digital Media Platform through which we are publishing international, national, states and local news mainly from Western Uttar Pradesh including Delhi NCR through Facebook, YouTube, Instagram, Twitter and our portal www.sancharnow.com
Leave a Comment