राम जन्मभूमि ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO की नियुक्ति को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. इस पद के लिए 5,300 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था, अब इनमें से 18 उम्मीदवारों को फाइनल राउंड के लिए चुना गया है. जानकारी के अनुसार, इन सभी के इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त को अयोध्या स्थित राम जन्मभूमि परिसर में होंगे. इसके बाद चयन समिति 3 नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट को सौंपेगी. ऐसी संभावना है कि ट्रस्ट 2 सितंबर को बैठक कर सकता है और इसी दिन नाम का आधिकारिक ऐलान होगा.
कैसे होगा CEO का चयन? कौन करेगा फैसला
बता दें CEO पद के लिए उम्मीदवारों के सामने कुछ खास शर्तें भी रखी गई थीं. आवेदक का हिंदू होना, नियमित रूप से हिंदू धर्म का पालन करना, शुद्ध शाकाहारी और शराब से पूरी तरह दूर रहने वाला होना जरूरी था. इसके अलावा, उम्र 50 से 70 साल के बीच और कम से कम 20 साल का प्रशासनिक अनुभव भी मांगा गया था. ऐसे में 18 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला काफी अहम माना जा रहा है.
CEO को क्या-क्या जिम्मेदारी मिलेगी?
अब बात करें CEO का काम क्या होगा, तो उसमें मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था से लेकर वित्तीय प्रबंधन तक की जिम्मेदारी शामिल है. इस पद पर चुने जाने वाले अधिकारी के अधीन 2,500 से ज्यादा कर्मचारी काम करेंगे. CEO को मंदिर की बड़ी वित्तीय व्यवस्था, चढ़ावे और दान की निगरानी, ऑडिट, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर नजर रखनी होगी.
इसके अलावा कर्मचारियों की व्यवस्था, कानूनी अनुपालन और केंद्र व राज्य सरकार के साथ समन्वय भी उनकी जिम्मेदारी होगी. CEO का कार्यकाल तीन साल का होगा. बता दें ट्रस्ट फंड और दान की व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल सिस्टम और कई स्तरों पर फोरेंसिक ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं लागू करने पर भी फोकस है.
राम मंदिर ट्रस्ट को क्यों पड़ी CEO की जरूरत?
राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO का पद बनाने का फैसला प्रशासन को ज्यादा प्रोफेशनल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया है. मालूम हो कि जून 2026 में मंदिर के दानपात्रों से पैसे, सोना और चांदी की कथित चोरी और गबन के आरोप सामने आए थे. इसके बाद, यूपी सरकार की SIT और स्थानीय पुलिस की जांच में FIR दर्ज हुई और आठ लोगों की गिरफ्तारी की गई. जांच के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी और कीमती सामान बरामद होने की बात सामने आई.
इस विवाद के बाद, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे और राजनीतिक दबाव बढ़ा. इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया. अब ट्रस्ट मंदिर की व्यवस्था को ज्यादा मजबूत बनाने के लिए CEO की नियुक्ति कर रहा है.
