औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सीईओ राकेश कुमार सिंह की बड़ी पहल, यमुना प्राधिकरण के प्रमुख पार्कों के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती

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संचार नाउ। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने अपने अधिसूचित सेक्टरों—28, 29, 32 और 33—में औद्योगिक भूखंडों के आवंटन, लीज़ डीड, मानचित्र स्वीकृति और निर्माण कार्यों में आ रही धीमी गति को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने सभी लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि पार्कों में उपलब्ध भूखंडों के आसपास की भूमि को तुरंत निर्माण योग्य बनाते हुए विकास कार्य तेज गति से पूरे किए जाएं।

दरअसल, यीडा सीईओ ने कहा कि कई पार्कों में भूखंड आवंटन तो हो चुका है, लेकिन भूमि का कब्जा और आवश्यक विकास कार्य पूरे न होने से निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि आवंटियों से तुरंत संपर्क कर यह सुनिश्चित किया जाए कि जहाँ भूमि उपलब्ध है वहाँ निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके। वहीं जिन भूखंडों का लीज़ प्लान जारी नहीं हुआ है, उसे तत्काल जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में तेजी से औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सीईओ ने पाँच प्रमुख औद्योगिक पार्कों के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है। MSME पार्क की जिम्मेदारी अजय कुमार शर्मा (डिप्टी कलेक्टर), मेडिकल डिवाइसेज़ पार्क की जिम्मेदारी कृष्ण गोपाल त्रिपाठी (उप जिलाधिकारी), हैंडीक्राफ़्ट पार्क की जिम्मेदारी शिव अवतार सिंह (विशेष कार्याधिकारी), अपैरल पार्क की जिम्मेदारी शैलेन्द्र कुमार सिंह (विशेष कार्याधिकारी) और टॉय पार्क की जिम्मेदारी अभिषेक माली (उप जिलाधिकारी) को सौंपी गई है। ये अधिकारी अब सीईओ को सीधे रिपोर्ट करेंगे और पार्कों में प्रगति से संबंधित विस्तृत विवरण हर 15 दिन में प्रस्तुत करेंगे।

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सीईओ ने यह भी निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर पार्क की कुल क्षमता के अनुरूप भूमि उपलब्ध नहीं है या किसी प्रकार की तकनीकी बाधा है, वहाँ विशेष अभियान चलाकर कब्जा हटाने, भूमि को समतल करने और विकास कार्यों को प्राथमिकता पर पूरा किया जाए। दिसंबर 2026 तक सभी पार्कों में अधिकतम औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

मुख्य कार्यपालक अधिकारी की इस पहल से यमुना प्राधिकरण में निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है। पार्कों में फंसे हुए निर्माण कार्यों को रफ्तार मिलेगी और निवेशकों को समयबद्ध सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएंगी। यह कदम न सिर्फ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देगा बल्कि हजारों रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा।

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