नोएडा: इंजीनियर मौत मामले में एक्शन जारी, पुलिस ने की पहली गिरफ्तारी

Sanchar Now
4 Min Read

नोएडा: राजधानी दिल्ली से नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया. यह इस मामले में पहली बड़ी गिरफ्तारी है. युवराज की मौत मामले में बिल्डर की भूमिका सामने आने के बाद यह एक्शन लिया गया है. वहीं, एनडीआरएफ की टीम ने भी मंगलवार दोपहर को 70 फीट गहरे बेसमेंट के अंदर से मृतक की कार को बरामद कर लिया है.

बिल्डर की गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

हादसे के बाद मृतक युवराज मेहता के पिता राज कुमार मेहता की शिकायत पर नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने दो बिल्डर कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी. मंगलवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया है. बिल्डर पर लापरवाही बरतने, निर्माण स्थल पर बैरिकेडिंग न करने, रिफ्लेक्टर या चेतावनी बोर्ड न लगाने के गंभीर आरोप हैं. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही से मौत) और 125 (जीवन को खतरे में डालना) के तहत मामला दर्ज किया है.

सरकार का कड़ा रुख: SIT गठित और बड़े तबादले

इस घटना ने नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए. सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे. इस मामले की जांच के लिए मेरठ जोन के एडीजी भानु भास्कर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम गठित की गई है, जो 5 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी. सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ लोकेश एम को पद से हटाकर प्रतीक्षारत कर दिया है. वहीं, ट्रैफिक सेल के एक जूनियर इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है और कई अन्य अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

पढ़ें  नोएडा में ठगों का आतंक प्लॉट बेचने के नाम पर करोड़ों की ठगी तो आईपीओ में निवेश के बहाने लाखों का लगाया चूना

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ था चौंकाने वाला खुलासा

इंजीनियर युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उन्होंने ठंडे पानी में दो घंटे तक मौत से संघर्ष किया. युवराज की मौत के पीछे केवल पानी नहीं, बल्कि सिस्टम की देरी और कड़ाके की ठंड भी थी. रिपोर्ट में इसे एंटीमॉर्टम ड्राउनिंग बताया गया यानी युवराज के फेफड़ों में पानी भरा पाया गया, जो इस बात का सबूत है कि डूबते समय उन्होंने बचने की पूरी कोशिश की. वह करीब दो घंटे तक पानी के बीच खड़ी कार की छत पर मदद का इंतजार करते रहे. कड़ाके की ठंड में पानी में भीगने के बाद उनकी हालत बिगड़ती गई और अंत में वह मौत से जंग हार गए. डॉक्टरों के मुताबिक, हाइपोथर्मिया और अत्यधिक घबराहट के कारण युवराज को कार्डियक अरेस्ट आया.

घटना का विवरण: मौत का ‘खुला गड्ढा’

बता दें कि यह घटना 16-17 जनवरी 2026 की दरमियानी रात को हुई थी. 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुरुग्राम से अपने घर सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क लौट रहे थे. घने कोहरे के कारण दृश्यता शून्य के करीब थी. इसी दौरान उनकी कार सेक्टर 150 में एक निर्माणाधीन मॉल के लिए खोदे गए करीब 70 फीट गहरे गड्ढे में गिर गई. यह गड्ढा बारिश और ड्रेनेज के पानी से लबालब भरा हुआ था. सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज करीब 90 मिनट तक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते रहे. उन्होंने कार की छत पर चढ़कर अपने पिता को फोन किया और मदद की गुहार लगाई, लेकिन पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों और रेस्क्यू उपकरणों की कमी के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका.

Share This Article
Follow:
Sanchar Now is Digital Media Platform through which we are publishing international, national, states and local news mainly from Western Uttar Pradesh including Delhi NCR through Facebook, YouTube, Instagram, Twitter and our portal www.sancharnow.com
Leave a Comment