संचार नाउ। उत्तर प्रदेश को मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। इन्वेस्ट यूपी की पहल पर यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने मेडिकल डिवाइसेज पार्क के अंतर्गत शुक्रा फ़ार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड को 10 एकड़ भूमि का आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) प्रदान किया है। इस परियोजना में लगभग ₹587 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है।
दरअसल, इस आशय पत्र प्रदान किए जाने के अवसर पर यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह, एसीईओ शैलेंद्र भाटिया तथा कंपनी की ओर से डॉ. मिनाक्षी लाटे (ग्रुप सीईओ एवं ग्लोबल हेड), गौरव शोकीन (सीओओ), अनिल कुमार वर्मा (उपाध्यक्ष) और कामिनी भारती (बिज़नेस यूनिट हेड) मौजूद रहे।
बीएनसीटी तकनीक से कैंसर इलाज को मिलेगा नया आयाम
मेडिकल डिवाइसेज पार्क में स्थापित होने वाली यह इकाई विश्वस्तरीय और जीवनरक्षक चिकित्सा तकनीकों के निर्माण पर केंद्रित होगी। खासतौर पर बीएनसीटी (Boron Neutron Capture Therapy) जैसी उन्नत कैंसर उपचार तकनीक का उत्पादन यहां किया जाएगा, जिसे जटिल कैंसर रोगों के इलाज में एक प्रभावी पद्धति माना जाता है।
रेडियोलॉजी और इमेजिंग उपकरणों का होगा स्वदेशी निर्माण
परियोजना के तहत रेडियोलॉजी और इमेजिंग से जुड़े उपकरणों—सीटी स्कैन, एमआरआई, पीईटी स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासोनोग्राफी मशीनों—का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा एनेस्थीसिया सिस्टम, आईसीयू और ऑपरेशन थियेटर के लिए आवश्यक रेस्पिरेटरी केयर उपकरण भी विकसित किए जाएंगे।
हृदय रोग उपचार के लिए उन्नत इम्प्लांट्स पर फोकस
मेडिकल डिवाइसेज पार्क में हृदय रोगों से जुड़े इम्प्लांट्स जैसे हार्ट वाल्व, स्टेंट्स और लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइसेज़ (LVAD) का उत्पादन भी किया जाएगा। साथ ही वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जैसे रेस्पिरेटरी सपोर्ट उत्पादों को भी परियोजना में शामिल किया गया है।
मेडिकल रोबोटिक्स से सर्जरी में आएगी नई सटीकता
इस परियोजना की एक बड़ी विशेषता मेडिकल रोबोटिक सिस्टम्स का विकास है। इसमें सॉफ्ट टिश्यू सर्जिकल रोबोट्स, ऑर्थोपेडिक रोबोटिक सिस्टम्स, डेंटल रोबोटिक सिस्टम्स और न्यूरो-स्पाइन रोबोटिक सिस्टम्स शामिल होंगे, जिससे जटिल सर्जरी में अधिक सटीकता और बेहतर परिणाम संभव हो सकेंगे।
डायग्नोस्टिक और मेडिकल ट्रेनिंग को मिलेगी मजबूती
इस सुविधा में इन-विट्रो डायग्नोस्टिक (IVD) उपकरण, पॉइंट-ऑफ-केयर टेस्टिंग डिवाइसेज़ और उन्नत एनालाइज़र्स का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही डॉक्टरों, नर्सों और पैरा-मेडिकल स्टाफ के प्रशिक्षण के लिए मेडिकल सिमुलेटर्स भी विकसित किए जाएंगे, जिससे चिकित्सा शिक्षा को तकनीकी मजबूती मिलेगी।
हजारों रोजगार और स्थानीय युवाओं को अवसर
यह परियोजना स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ रोजगार सृजन के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। अनुमान है कि इस मेडटेक पार्क से 900 से अधिक प्रत्यक्ष और लगभग 2000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं की भर्ती और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
आयात निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में ही विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीक सुलभ हो सकेगी। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में यह परियोजना औद्योगिक विकास, स्वास्थ्य नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
