संचार नाउ। डॉक्टरों को अक्सर धरती का भगवान कहा जाता है, क्योंकि उनसे उम्मीद होती है कि वे हर हाल में मरीज की जान बचाने का प्रयास करेंगे। लेकिन ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल से सामने आया एक मामला इन उम्मीदों पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। यहां एक ढाई साल के मासूम की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही और पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।
दरअसल, ढाई वर्षीय गगन शुक्रवार को परी चौक के पास एक तीन मंजिला इमारत से गिर गया था। गगन के परिजन मजदूरी का काम करते हैं। घटना के बाद उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन घायल गगन को लेकर शारदा अस्पताल पहुंचे और तुरंत इलाज शुरू करने की गुहार लगाई।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पहले 28 हजार रुपये जमा कराने की मांग की गई। उन्होंने डॉक्टरों से कहा कि वे पैसे की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन पहले बच्चे का इलाज शुरू कर दिया जाए। आरोप है कि इसके बाद एक अन्य डॉक्टर ने आकर बताया कि बच्चे के इलाज में रोजाना करीब 70 हजार रुपये का खर्च आएगा और पहले पैसे जमा करने को कहा गया।
परिजनों के मुताबिक डॉक्टरों ने इलाज शुरू करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन करीब एक से डेढ़ घंटे तक कोई उपचार नहीं किया। बाद में डॉक्टरों ने बताया कि गगन की मौत हो चुकी है। परिजनों का आरोप है कि बच्चे को न तो कोई प्राथमिक उपचार दिया गया और न ही कोई पट्टी की गई। उनका कहना है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ही गगन की जान चली गई।
घटना के बाद परिजनों ने जब अस्पताल में हंगामा किया तो आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने बच्चे का शव देने से पहले भी 28 हजार रुपये जमा कराने की मांग की। इसी दौरान पुलिस को बुलाया गया। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने भी उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें धमकाते हुए अस्पताल से बाहर जाने का दबाव बनाया।
अंततः पुलिस ने पंचनामा भरकर गगन का शव परिजनों को सौंप दिया और उन्हें अस्पताल से बाहर कर दिया। मासूम गगन की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजन डॉक्टरों की लापरवाही और पुलिस के रवैये को लेकर न्याय की मांग कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
वहीं घटना के बाद रविवार को शारदा अस्पताल की ओर से मीडिया प्रतिनिधि प्रसन्नता शांडिल्य ने बताया कि बच्चे को अस्पताल लाए जाने के समय उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी और ऊंचाई से गिरने के कारण उसे गहरी अंदरूनी चोटें आई थीं। अस्पताल प्रशासन के अनुसार चिकित्सकीय टीम ने तत्काल आवश्यक उपचार शुरू कर बच्चे को बचाने का पूरा प्रयास किया। अस्पताल का कहना है कि उपचार के लिए किसी प्रकार की धनराशि की मांग या वसूली नहीं की गई और इलाज निःशुल्क किया गया।
