लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद के बाद अब राज्यसभा में भी खत्म होगा बसपा का वजूद, ‘शून्य’ हो जाएगी पार्टी

Sanchar Now
8 Min Read

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावों का ऐलान निर्वाचन आयोग ने कर दिया है. आयोग ने 16 अक्टूबर को मतदान की तारीख रखी है और इसके नतीजों के आते ही यूपी की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी का वजूद संख्याबल में  शून्य हो जाएगा. ये यूपी के संसदीय इतिहास में पहली बार होगा जब बसपा का लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद में एक भी सदस्य नहीं होगा.

बसपा अपनी स्थापना के बाद से पहली बार ऐसा दिन देखने जा रही है जब प्रदेश की राजनीति में वो किसी भी सदन का हिस्सा नहीं रहेगी. हालांकि, वर्तमान में बसपा के रामजी गौतम किसी भी सदन में अकेले प्रतिनिधि हैं और उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 में पूरा होने जा रहा है.

कैसे राज्यसभा चुनावों के बाद शून्य होगा बसपा?

यूपी में बीजेपी के हरदीप सिंह पूरी, अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, सीमा, बी.एल. वर्मा और दिनेश शर्मा का कार्यकाल पूरा होने से 8 सीटें खाली हो जाएंगी. इसके अलावा समाजवादी पार्ट के रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल पूरा होने से 2 सीटें खाली होंगी. इस तरह कुल 10 सीटों पर चुनाव होने हैं.  यूपी में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 37 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है, लेकिन बसपा के पास एक भी विधायक नहीं है.

बीजेपी या सपा अपने विधायकों के कीमती वोट दूसरी पार्टी के उम्मीदवार को जिताने के लिए देंगे, इसकी संभावना भी शून्य के बराबर है. बीजेपी और सपा राज्यसभा की अधिक सीटों पर कब्जा करना चाहेंगे ऐसे में बसपा के लिए यहां दूसरी पार्टी से भी कोई उम्मीद नहीं है.

बसपा के पास संख्याबल क्यों नहीं?

पढ़ें  मुंह पर पोती कालिख, पेड़ से बाधां और कतर दिए बाल, आखिर पंचायत ने क्यों दी महिला को ऐसी सजा

गौर हो कि 2024 के लोकसभा चुनावों में बसपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी और शून्य पर पार्टी सिमट गई थी. यूपी के 2022 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो बसपा की टिकट से केवल एक ही उम्मीदवार उमाशंकर को जीत मिली थी, लेकिन उनके निधन के बाद विधानसभा में पार्टी शून्य हो गई. यूपी के विधान परिषद में भी बसपा का एक भी सदस्य नहीं है. अब राज्यसभा में भी पार्टी शून्य पर सिमट जाएगी क्योंकि बसपा के पास पार्टी के प्रत्याशी को जीताने के लिए कोई संख्याबल है ही नहीं.  कुल मिलाकर रामजी गौतम का राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद बसपा की ये सीट दूसरे दलों के पास चली जाएगी और संसद में बसपा का एक भी प्रतिनिधि नहीं बचेगा.

बसपा कैसे शून्य पर आ गिरी है?

काशीराम ने 14 अप्रैल 1984 को बसपा की स्थापना की थी. 1987 में पार्टी को चुनाव चिन्ह आंवटित हुआ था. 1989 में पहली बार बसपा के 13 विधायकों ने जीत दर्ज  की थी. अपनी स्थापना के बाद से बसपा 4 बार यूपी की सत्ता में रही है और तो और 2007 में 206 सीटें जीतकर तो पूर्ण बहुमत के साथ सरकार भी बनाई थी. 2012 के बाद से बसपा के दिन उल्टे चलने लगे और अब 42 साल के इतिहास में पहली बार होगा जब पार्टी का किसी भी सदन में एक भी प्रतिनिधि नहीं होगा.

साल 2012 के विधानसभा चुनावों में ये पार्टी सत्तविरोधी लहर के कारण सीधे 80 सीटों पर सिमट गई. साल 2014 के लोकसभा चुनावों में ये पार्टी मोदी लहर में जीरो पर सिमट गई. इसके बाद साल 2017 के विधानसभा चुनावों में इस पार्टी को केवल 19 सीटें ही मिली और 2022 के विधानसभा चुनावों में केवल एक ही सीट जीत सकी थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनावों बसपा एक भी सीट जीतने में नाकाम रही.

पढ़ें  प्रिंसिपल सर को मैडम से ‘KISS’ चाहिए, गाल पर इशारा कर बताया; वीडियो हुआ वायरल

क्या है इसकी वजह? विश्लेषकों ने बताया

वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा के मुताबिक दूसरी पार्टियों के नेताओं के मुकाबले मायावती जनता और कार्यकर्ताओं के बीच में बेहद कम सक्रिय नजर आती है. जिसका असर चुनाव में देखने को मिलता है.

योगेश मिश्रा के मुताबिक यूपी में कई बड़ी पार्टियां और उनके नेता है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निषाद पार्टी के संजय निषाद और सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर जैसे नेता लगातार जनता और कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय नजर आते हैं, मायावती की राजनीतिक कार्यशैली इन सबसे अलग है. पिछले करीब 15 सालों से मायावती से मुलाकात चाहे जनता हो या पार्टी कार्यकर्ता या प्रतिनिधिमंडल हो बहुत सीमित रही है. मायावती और उनकी पार्टी की राजनीति पार्टी पदाधिकारी और कोऑर्डिनेटरों के जरिए ही चल रही है.

योगेश मिश्रा ने बताया कि मायावती का जनता से सीधा कनेक्शन बिल्कुल ना के बराबर है. दूसरे दलों के नेता सुख-दुख दुर्घटना या किसी समारोह में एक दूसरे के यहां आते-जाते नजर आ जाएंगे लेकिन मायावती का नजर आना बेहद मुश्किल होगा. इन सब के बाद भी बीएसपी का अस्तित्व कायम रहने के पीछे काशीराम के समय तैयार किया गया संगठन और मिशन का काम है. उन्होंने पार्टी को सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रखा था. विधानसभा चुनाव को देखते हुए BSP के लिए यह तय करना अहम होगा कि वह अपने पारंपरिक वोट आधार को किस तरह फिर से चुनावी ताकत में बदलती है.

यूपी सहित कई राज्यों में था प्रभाव

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंद्र शुक्ला ने बताया कि मौजूदा समय में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति बेहद चुनौती पूर्ण दूर से गुजर रही है. 2022 विधानसभा चुनाव में पार्टी एकमात्र सीट जीतने में कामयाब हुई थी. बलिया से एकमात्र विधायक उमाशंकर ने जीत हासिल की थी जिनका निधन हो गया है. ऐसे में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपना राजनीतिक दायरा बढ़ाना चुनौती से काम नहीं होगा. पार्टी की स्थापना 1984 में काशीराम ने की थी. इसके बाद पार्टी ने उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार पंजाब महाराष्ट्र और उत्तराखंड में अपना दायरा पार्टी के संगठन को मजबूत किया.

पढ़ें  शादी का झांसा देकर दारोगा कर रहा था शिक्षिका का यौन शोषण, ADG के आदेश पर केस दर्ज

ज्ञानेंद्र शुक्ला ने बताया कि एक वक्त ऐसा था जब मायावती की हनक थी और पार्टी सत्ता में थी. लेकिन अब पार्टी का दायरा दिन पर दिन लगातार गिरता जा रहा है. 2019 के लोकसभा चुनाव में BSP ने उत्तर प्रदेश में 10 सीटें जीती थीं. 2024 में एक भी सीट नहीं जीत सकी. यानी सबसे पहले लोकसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व शून्य हो गया. फिलहाल बीएसपी के एकमात्र राज्यसभा सांसद राम जी गौतम का कार्यकाल भी 25 नवंबर 2026 को पूरा हो रहा है.

9.4% वोट शेयर फिर भी कोई सीट नहीं

ज्ञानेंद्र शुक्ला ने बताया कि पार्टी की चुनौती सिर्फ सीटों तक सीमित नहीं है. 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी को करीब 9.4 फीसदी वोट मिले थे. इसके बाद भी वह वोट किसी लोकसभा सीट में तब्दील नहीं हो सका. ऐसे में पार्टी के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को बनाए रखने के साथ उसे दोबारा सीटों में बदलने की चुनौती है. इसके साथ ही राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बनाए रखना भी मुश्किल है.

Share This Article
Follow:
Sanchar Now is Digital Media Platform through which we are publishing international, national, states and local news mainly from Western Uttar Pradesh including Delhi NCR through Facebook, YouTube, Instagram, Twitter and our portal www.sancharnow.com
Leave a Comment