उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों को लेकर बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। अब प्रदेश के सभी भर्ती आयोगों को रोस्टर प्रणाली के अनुसार रिक्त पदों को भरना अनिवार्य होगा। जिन भर्तियों पर न्यायालय का स्थगन नहीं है, उनमें किसी भी प्रकार की देरी होने पर संबंधित आयोगों को राज्य सरकार को स्पष्ट कारण बताना होगा। सरकार का उद्देश्य है कि वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से तीन से चार माह पहले सभी रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए और चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित कर दिए जाएं।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले पूरी होंगी भर्तियां
प्रदेश सरकार की रणनीति साफ है कि चुनावी अधिसूचना जारी होने से पूर्व सभी लंबित पदों पर नियुक्तियां कर दी जाएं। उत्तर प्रदेश में भर्तियों की जिम्मेदारी कई प्रमुख आयोगों और बोर्डों पर है, जिनमें उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, उत्तर प्रदेश विद्युत सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड तथा सहकारी संस्थागत सेवा मंडल शामिल हैं। विभिन्न विभाग समय-समय पर इन आयोगों को भर्ती प्रस्ताव भेजते हैं, जिनके आधार पर चयन प्रक्रिया संचालित की जाती है।
ई-अधियाचन पोर्टल से प्रक्रिया में पारदर्शिता
भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने “ई-अधियाचन” नामक पोर्टल की व्यवस्था की है। इसके माध्यम से विभाग ऑनलाइन तरीके से रिक्तियों का प्रस्ताव भेज सकते हैं। सभी आयोगों को प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में भर्ती कैलेंडर जारी करना होता है, जिसमें यह स्पष्ट करना होता है कि किस पद की भर्ती कब तक पूरी की जाएगी। हालांकि पूर्व में कई भर्तियां निर्धारित समयसीमा से आगे बढ़ती रही हैं, जिसे लेकर हाल ही में शासन स्तर पर समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में यह सहमति बनी कि अब भर्तियां तय समय के भीतर ही पूरी की जाएंगी। कार्मिक विभाग जल्द ही इस संबंध में औपचारिक निर्देश जारी करेगा।
युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार की मंशा है कि अधिक से अधिक रिक्त पदों को शीघ्र भरकर पात्र युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। यदि भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो हजारों युवाओं को विधानसभा चुनाव से पहले नियुक्ति पत्र प्राप्त हो सकेंगे। इससे प्रशासनिक कार्यक्षमता में भी सुधार होगा और विभागों में लंबित कार्यों की गति तेज होगी।
निजी विश्वविद्यालयों को बढ़ावा, स्टांप शुल्क में बड़ी छूट
भूमि खरीद पर 100 प्रतिशत तक राहत
प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्थापना हेतु भूमि क्रय पर स्टांप शुल्क में बड़ी छूट देने का निर्णय लिया है। यह छूट भूमि के मूल्य के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में दी जाएगी।
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50 करोड़ रुपये तक की भूमि पर 50 प्रतिशत छूट
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50 करोड़ से 150 करोड़ रुपये तक की भूमि पर 30 प्रतिशत छूट
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150 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की भूमि पर 20 प्रतिशत छूट
इस संबंध में प्रमुख सचिव स्टांप अमित गुप्ता द्वारा अधिसूचना जारी कर सभी जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश भेज दिए गए हैं।
शिक्षा निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन
इस निर्णय से प्रदेश में निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्टांप शुल्क में राहत मिलने से विश्वविद्यालय स्थापित करने की लागत कम होगी, जिससे अधिक संस्थान प्रदेश में आने के लिए प्रेरित होंगे। इससे न केवल उच्च शिक्षा का दायरा विस्तृत होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
