नोएडा: दिल्ली-एनसीआर में आसमान से आग बरस रही है. पारा 45 डिग्री के पार है. डॉक्टर कह रहे हैं कि घर से बाहर निकलें तो पानी साथ रखें, लगातार पानी पीते रहें. लेकिन उन गरीबों, मजदूरों और राहगीरों का क्या, जिनके पास पानी खरीदने के पैसे नहीं हैं?
नोएडा प्राधिकरण ने बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर दावा किया था कि शहर में जगह-जगह ‘फ्री वाटर एटीएम’ लगाए गए हैं ताकि हर किसी को शुद्ध और स्वच्छ पानी मिल सके. लेकिन इस भीषण गर्मी में जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब नोएडा के ये वाटर एटीएम सफेद हाथी साबित हो रहे हैं.”
नोएडा में पानी के एटीएम भीषण गर्मी के बावजूद बंद
नोएडा के अलग-अलग चौकों पर हरौला लेबर चौक हो, सेक्टर-12 हो या सेक्टर-24… हर जगह कहानी एक जैसी है. लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. भीषण गर्मी के बावजूद नोएडा प्राधिकरण की ओर से पेयजल व्यवस्था को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई दे रही है. कभी तकनीकी खराबी तो कभी बिजली कटौती का बहाना बनाकर इन एटीएम को बंद रखा जाता है, या फिर इनका कोई तय समय ही नहीं है.
महिलाएं पानी केलिए घंटों इंतेजार करने पर मजबूर
सेक्टर-12 मे एक महिला बैठी मिली जो ‘फ्री वाटर एटीएम’ से पानी लेने आई थी, महिला ने बताया कि साड़े तीन बजे से बैठी है.. लेकिन पानी नहीं मिल रहा है. वे बताती है कि इंहें बताया गया कि 5:00 बजे खोलेंगे, तब तक इंतजार करो. अब इतनी गर्मी में हम कहाँ जाएं, काम छोड़कर यहाँ घंटों इंतजार कर रहे हैं.”
भीषण गर्मी में पब्लिक त्राहि-त्राहि कर रही है
”ये गवर्नमेंट की सर्विस बिल्कुल बेकार और फेल है. इतनी भीषण गर्मी में पब्लिक त्राहि-त्राहि कर रही है और ये एटीएम सुबह-शाम के भरोसे चल रहा है. दिनभर इसे बंद रखते हैं. ऊपर से नियम बना दिया है कि 24 घंटे में सिर्फ 20 लीटर पानी ही मिलेगा. अब बताइए, इस गर्मी में इतने पानी में क्या होगा? शिकायत करने जाओ तो कोई सुनने वाला नहीं है.”- प्रदीप कुमार, स्थानीय निवासी-
वही सतीश कुमार कहते है कि इसमें सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ये पूरे दिन खुलता ही नहीं है. सुबह थोड़ा सा खोलते हैं, फिर बंद करके रख देते हैं. शाम को भी कभी खुलता है, कभी बहुत कम समय के लिए खुलता है. गर्मी को लेकर प्रशासन की तरफ से यहाँ पानी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है. गरीब आदमी कहाँ जाए?”
यह है नोएडा में ‘फ्री वाटर एटीएम’ की हकीकत. जो वाटर एटीएम इस तपती गर्मी में 24 घंटे खुले रहने चाहिए थे, वो सरकारी बाबुओं और ठेकेदारों की लापरवाही की वजह से बंद पड़े हैं. गरीब मजदूर और राहगीर काम धंधा छोड़कर, इस 45 डिग्री की धूप में सिर्फ एक बोतल पानी के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं.
