जौहर यूनिवर्सिटी पर बड़ा एक्शन, मस्जिद और आजम खान का ‘फैमिली’ ट्रस्ट बने रजिस्ट्रेशन कैंसिल होने का आधार

Sanchar Now
3 Min Read

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. आयकर विभाग (लखनऊ) ने बड़ा कदम उठाते हुए मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का चैरिटेबल पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है. प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (केंद्रीय) गौरव बाथम द्वारा जारी 147 पन्नों के कड़े आदेश में ट्रस्ट की वित्तीय गड़बड़ियों और नियमों के उल्लंघन की पूरी कुंडली खोली गई है. पंजीकरण रद्द होने के बाद अब इस ट्रस्ट को आयकर में मिलने वाली भारी छूट पूरी तरह खत्म हो जाएगी.

₹46 करोड़ का दावा, मूल्यांकन निकला ₹494 करोड़

आयकर विभाग की इस बड़ी कार्रवाई के पीछे सबसे मुख्य आधार वित्तीय अनियमितता को बनाया गया है. साल 2023 में हुई छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्यों के बाद विभाग ने पाया कि जौहर ट्रस्ट ने यूनिवर्सिटी निर्माण में केवल 46 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया था. जबकि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने जब इसका सरकारी मूल्यांकन किया, तो यह लागत 494 करोड़ रुपये आंकी गई. लागत के बीच का यह ₹448 करोड़ का भारी अंतर और संदिग्ध चंदा ही ट्रस्ट के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत बना, जिसका ट्रस्टी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके.

चैरिटेबल ट्रस्ट की आड़ में ‘फैमिली ट्रस्ट’ चलाने का आरोप

आयकर विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में साफ कहा है कि यह कोई सामाजिक या चैरिटेबल संस्था नहीं बल्कि पूरी तरह से एक ‘फैमिली ट्रस्ट’ है. ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक, आजम खान इसके आजीवन अध्यक्ष हैं और उनके परिवार के सदस्य आजीवन संरक्षक हैं. कुल 9 ट्रस्टियों में से 5 सदस्य अकेले आजम खान के परिवार से ही हैं. बाकी बचे 4 गैर-पारिवारिक सदस्यों को विभाग ने महज ‘डमी ट्रस्टी’ (नाममात्र का सदस्य) माना है, जिनका ट्रस्ट के फैसलों पर कोई नियंत्रण नहीं था.

पढ़ें  नैनीताल में बड़ा हादसा, लखनऊ के पर्यटकों की कार खाई में गिरी, चालक समेत 7 लोग घायल

नियमों की धज्जी उड़ाकर परिसर में बनाई अवैध मस्जिद

भूमि आवंटन की शर्तों का खुला उल्लंघन भी इस कार्रवाई की बड़ी वजह बना. साल 2005 में ट्रस्ट को केवल शैक्षणिक और सामाजिक कार्यों के लिए जमीन खरीदने की अनुमति मिली थी. लेकिन नियमों के विपरीत जाकर यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर मस्जिद का निर्माण करा दिया गया. चौंकाने वाली बात यह है कि जब अन्य गैर-पारिवारिक ट्रस्टियों से इस बारे में पूछताछ हुई, तो उन्होंने मस्जिद निर्माण की जानकारी होने से ही साफ इनकार कर दिया, जिसे विभाग ने पूरी तरह से असंभव माना. इस बड़े झटके के बाद अब जौहर ट्रस्ट के पास इस विभागीय आदेश के खिलाफ इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) में अपील दायर करने का ही विकल्प बचा है.

Share This Article
Follow:
Sanchar Now is Digital Media Platform through which we are publishing international, national, states and local news mainly from Western Uttar Pradesh including Delhi NCR through Facebook, YouTube, Instagram, Twitter and our portal www.sancharnow.com
Leave a Comment