लखनऊ। प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब जूनियर पीसीएस अधिकारियों का वेतन भी आईएएस और वरिष्ठ पीसीएस अधिकारियों की तरह सीधे शासन स्तर से जारी किया जाएगा। इस फैसले के साथ ही पीसीएस संवर्ग में लंबे समय से चली आ रही दोहरी वेतन व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जिससे अधिकारियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीकृत व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता
सरकार द्वारा लागू की गई नई व्यवस्था के तहत अब वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह केंद्रीकृत कर दी गई है। पहले जहां अलग-अलग स्तरों पर वेतन जारी होता था, वहीं अब सभी प्रक्रियाएं शासन स्तर से नियंत्रित होंगी। इससे न केवल पारदर्शिता में सुधार होगा, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली भी अधिक व्यवस्थित बनेगी।
शासनादेश के प्रमुख बिंदु
प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब वेतन प्राधिकार पत्र नियुक्ति अनुभाग-11 के माध्यम से जारी किए जाएंगे। इसी दस्तावेज के आधार पर कोषागार से वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे वेतन वितरण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और जवाबदेह बनेगी।
पे-मैट्रिक्स के अनुसार वेतन वितरण व्यवस्था
नई प्रणाली में पे-मैट्रिक्स के आधार पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया तय की गई है। लेवल-11 और उससे ऊपर के अधिकारी पहले की तरह स्वयं अपना वेतन आहरण करेंगे, जबकि लेवल-10 के अधिकारियों का वेतन संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी के जरिए जारी किया जाएगा। इस व्यवस्था से विभिन्न स्तरों के अधिकारियों के बीच स्पष्टता बनी रहेगी।
नियमों का सख्ती से पालन जरूरी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना वेतन प्राधिकार पत्र के यदि कोई भुगतान किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इसके अलावा भविष्य निधि (पीएफ), आयकर और अन्य आवश्यक कटौतियां पूर्व की तरह नियमानुसार जारी रहेंगी।
पहले क्या थी व्यवस्था
अब तक पीसीएस अधिकारियों को एडीएम स्तर तक पदोन्नति मिलने तक वेतन प्राधिकार पत्र जिला स्तर से ही जारी किया जाता था। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब जैसे ही कोई अधिकारी पीसीएस के रूप में नियुक्त होगा, उसका वेतन प्राधिकार पत्र सीधे शासन स्तर से जारी किया जाएगा।
निर्णय से मिलेंगे दीर्घकालिक लाभ
इस फैसले से वेतन वितरण प्रक्रिया में न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि वित्तीय अनुशासन को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही प्रशासनिक प्रणाली में एकरूपता आने से अधिकारियों को अनावश्यक जटिलताओं से भी मुक्ति मिलेगी।
